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महाभारत: ''लाक्षागृह'' का जल्द खुलेगा राज, दुर्योधन ने पांडवों को जलाने का रचा था षड़यंत्र

महाभारत काल में पांडवों को जिंदा जलाने के लिए बनाया था लाक्षागृह।

महाभारत:

भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) ने महाभारत के ऐतिहासिक स्थल 'लाक्षागृह' की खुदाई पर सहमति दे दी है। पुरातत्वविद और स्थानीय इतिहासकार इस ऐतिहासिक स्थल की खुदाई की मांग वर्षों से करते रहे थे।

ये महाभारत काल का वही ऐतेहासिक स्थल है जहां दुर्योधन एवं मामा शकुनि ने षड़यंत्र से पांडवों को मारने की कोशिश की थी।

दरअसल स्थानीय लोग मानते हैं कि 'लाक्षागृह' के ऐतिहासिक साक्ष्य बागपत के बरवाना क्षेत्र में मिलते हैं।

पांडवों को जलाने की साजिश थी

महाभारत में 'लाक्षागृह' की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। कौरवों ने लाख से इसको बनवाया था और इसमें पांडवों को जिंदा जलाने की साजिश रची गई थी, लेकिन सुरंग के माध्यम से पांडवों ने निकलकर अपनी जान बचाई थी।

बरवाना क्षेत्र में मिले साक्ष्य

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस स्थल के ऐतिहासिक साक्ष्य बागपत के बरवाना क्षेत्र में मिलते हैं। बरनावा का पुराना नाम वर्णाव्रत माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि ये उन पांच गावों में शुमार था, जिनको पांडवों ने कौरवों से मांगा था।

अगले माह से होगी खुदाई

एएसआई अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर के पहले सप्ताह में स्थल की खुदाई का काम शुरू होगा और अगले तीन महीनों तक चलेगा। पुरातत्व विभाग के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के छात्र भी खुदाई के काम में सहयोग देंगे। उल्लेखनीय है कि यह जगह ऐतिहासिक चंदयान और सिनौली स्थल के निकट है।

पहले भी मिले थे पुरातत्व अवशेष

2005 में सिनौली की खुदाई से हड़प्पा काल के शवदाह स्थल का पता चला था। इस जगह से अस्थियां और बड़ी मात्रा में बर्तन मिले थे। इसी तरह 2014 में चंदयान गांव से तांबे का एक क्राउन मिला था।

पांडव सुरंग से निकले थे सुरक्षित

महाभारत में कौरवों द्वारा लाख से बनाए लाक्षागृह का जिक्र मिलता है। यह लाक्षागृह कौरवों में पांडवों को जिंदा जलाने के लिए बनाया था लेकिन षडयंत्र की भनक लगने पर पांडवों ने लाक्षागृह के नीचे सुरंग बनाकर ऐन वक्त पर अपनी जान बचाई थी।

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