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इस वीर ने बचाई थी ''शेख हसीना'' की जान

ढाका हवाईअड्डे से 20 मिनट की दूरी पर, धनमंडी क्षेत्र में स्थित एक घर में लगभग एक दर्जन पाकिस्तानी सैनिकों ने घेर रखा था और बंगबंधु के पूरे परिवार को बंधक बना कर रखा था।

इस वीर ने बचाई थी शेख हसीना की जान
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दिसंबर 1971 के युद्ध के दौरान अपने प्रसिद्ध 'डैश ऑफ डाका' के बाद जनरल एएक 'टाइगर' नियाजी की अगुवाई में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के भारतीय सेना बल के सामने आत्मसमर्पण करने के एक दिन बाद मेजर अशोक तारा को बहुत महत्तवपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।

29 वर्षीय तारा को उस दौरान गंगासार के युद्ध के लिए लगभग एक हफ्ते पहले ही वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्हे बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पत्नी और परिवार को बचाने का काम सौंपा गया था जिसमें शेख मुजीबुर रहमान की 24 वर्षीय बेटी शेख हसीना और हसीना का बच्चा भी शामिल था।

ढाका हवाईअड्डे से 20 मिनट की दूरी पर, धनमंडी क्षेत्र में स्थित एक घर में लगभग एक दर्जन पाकिस्तानी सैनिकों ने घेर रखा था और बंगबंधु के पूरे परिवार को बंधक बना कर रखा था। तब तारा ने 3 सैनिकों के साथ अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए बंगबंधु के परिवार की जान बचा ली।
शनिवार को, 46 साल बाद कर्नल तारा, प्रधानमंत्री मोदी और शेख हसीना के साथ "सोमानोना सेरेमनी" में शामिल हुए जहां सभी 1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि इकठ्ठा हुए थे।
अशोक तारा ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि उन्होने बगैर किसी हथियार के शेख हसीना के परिवार की जान अकेले बचाई थी। उन्होनें मीडिया को बताया कि शेख हसीना जी मुझे और मेरी पत्नी को देखकर बहुत खुश हुईं।
उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए चले 13 दिवसीय युद्ध में भारत ने करीब अपने 3,843 सैनिकों को खो दिया था।

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