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अब भारत में ही होगी ''हींग'' की खेती, बचेगी करोड़ों की विदेशी मुद्रा

हींग का बीज किसी विदेशी को बेचने पर मौत की सजा तक सुनाई जा सकती है।

अब भारत में ही होगी
नई दिल्ली. ज्यादातर मसालों का उत्पादन भारत में होता है। लेकिन हर सब्जी में डालने वाली हींग की बात करे तो इसका पैदावार भारत में नहीं होता। दुनिया में साल भर में पैदा की जाने वाली हींग का 40 प्रतिशत इस्तेमाल भारत में होता है।

हींग के आयात पर हर साल करोड़ों रुपए की विदेशी करेंसी बर्बाद होती है। अभी तक न ही किसी सरकार ने और न ही किसी कृषि विश्वविद्यालय ने हींग के उत्पादन की शुरुआत करने का सोचा। इस हालत से उबरने और भारत के किसानों को आय का नया विकल्प देने के लिए इंडियन कॉफी बोर्ड के सदस्य डॉ. विक्रम शर्मा ने अपनी ओर से पहल की है। डॉ. शर्मा को इसके लिए न तो सरकार की ओर से कोई मदद मिल रही है और न ही किसी निजी संगठन की ओर से। वह अपने दम पर इस मुहिम में जुटे हैं।
विक्रम ने इस काम को अंजाम देने के लिए हाल में ईरान से हींग के बीज मंगाए हैं। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के पास पहाड़ी इलाके में हींग की खेती की शुरुआत की जाएगी। इसके साथ ही वह राज्य के सोलन, लाहौल-स्फीति, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और चंबा में भी हींग की खेती कराना चाहते हैं। डॉ. शर्मा बताते हैं कि वह उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और नेपाल से सटे यूपी के पहाड़ी इलाके में भी हींग उगाना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस समय शुद्ध हींग का बाजार मूल्य 35 हजार रुपए किलो है।
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, आपको बता दें कि है। 2012 में जम्मू और कश्मीर के डॉ. गुलजार ने अपने राज्य में हींग की खेती की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास कामयाब नहीं हो पाया। डॉ. शर्मा कहते हैं कि हींग का पौधा जीरो से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान सहन कर सकता है। इस लिहाज से देश के पहाड़ी राज्यों के कई इलाके हींग की खेती के लिए मुफीद हैं। इन राज्यों में किसान अब भी परंपरागत खेती कर रहे हैं और इसे जंगली और आवारा पशु भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
खास बात
हींग की खेती आसान नहीं है, क्योंकि इसका बीज हासिल करना बहुत मुश्किल काम है। दुनिया में इसकी खेती मुख्य रूप से अफगानिस्तान, ईरान, इराक, तुर्कमेनिस्तान और बलूचिस्तान में होती है। वहां हींग का बीज किसी विदेशी को बेचने पर मौत की सजा तक सुनाई जा सकती है।
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