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बजट 2017: जेटली की पोटली से निकलेंगे गरीबों के लिए ये तोहफे

1 फरवरी को संसद में पेश होगा केंद्रीय बजट

बजट 2017: जेटली की पोटली से निकलेंगे गरीबों के लिए ये तोहफे
नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र में एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने पर चुनाव आयोग के फैसले और केंद्र सरकार के बीच भले ही संशय के बादल मंडरा रहे हों, लेकिन मोदी सरकार केंद्रीय बजट में अपनी पोटली से देश की अर्थव्यवस्था के संतुलन की दिशा में गरीबों के लिए तोहफो की बौछार कर सकती है। मोदी सरकार नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नए वित्तीय वर्ष को बदलाव की डगर को आगे बढ़ाने के प्रयास में है। सूत्रों के अनुसार इस बार संसद के बजट सत्र के दौरान गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए तोहफो की बरसात हो सकती है। वैसे भी आर्थिक विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे हैं कि नोटबंदी के फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था में सुधारात्मक बदलाव के संकेत दिये हैं, जिसका नतीजा माना जा रहा है कि देश के गरीबों को आमदनी के तौर पर खासकर बेरोजगारों को सालाना तयशुदा रकम देने की योजना का ऐलान किया जा सकता है। ऐसी योजना का ऐलान करने के लिए मोदी सरकार पहले से ही संकेत देती आ रही है।
नीति आयोग में खाका तैयार
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय को नीति आयोग ने सरकार की रणनीति के तहत एक खाका तैयार करके दे दिया है, जिसमें गरीब परिवारों के बेरोजगारों को एक तय रकम देने का विचार बजट का हिस्सा हो सकता है। बताया जा रहा है नोटबंदी के बाद देश में गरीबी का आंकड़ा घटने की उम्मीद की जा रही है। सरकार की गरीबी उन्मूलन की दिशा में चलाई जा रही मुहिम में इस योजना को खासतौर पर सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों पर लागू करेगी, जिसमें बेरोजगारों को सालाना आमदनी के आधार पर एक तयशुदा रकम दी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार बीपीएल परिवारों के लिए ऐसी योजना पहले से ही छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व केरल में चलाई जा रही है।
सब्सिडी का लाभ
आगामी बजट में ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में सस्ता घर मुहैया कराने की दिशा में अहम प्रावधान किया जा सकता है। इसके लिए पीएम मोदी ने इस तबके के लिए कर्ज पर ब्याज कम करने की घोषणा पहले ही कर दी है। अब सरकार ने बैंकों से अपील की है कि वह नोटबंदी से आए अतिरिक्त लिक्विडिटी का इस्तेलाम समाज-कल्याण के लिए करे, जिसमें सस्ते घरों और छोटे कारोबारियों के लिए सस्ता कर्ज शामिल है। गौरतलब है कि यह फरमान एक बार फिर सरकार की मंशा सरकारी खजाने से गरीब तबके को सहारा देने की है। वहीं देश में आर्थिक तेजी के लिए जरूरी है कि सरकार जल्द से जल्द सब्सिडी के बोझ को कम करे।
रेल बजट का समावेश
देश में मोदी सरकार ने पहली बार रेल बजट को आम बजट में समायोजित करने का फैसला भी ऐतिहासिक होगा। अभी तक रेल बजट अलग से पेश होता रहा था। सरकार ने बजट में योजना और गैर-योजना बजट जैसे वर्गीकरण में भी बदलाव लाने का फैसला किया है। इसके स्थान पर बजट वर्गीकरण राजस्व और पूंजी व्यय के तौर पर होगा। इसके अलावा सरकार इस बजट में नोटबंदी के बाद मजबूत होती अर्थव्यवस्था में सस्ते कर्ज का ऐलान कर सकती है, जिसमें होम लोन को सस्ता करने का कुछ बैंक तो ऐलान पहले ही कर चुके हैं। मसलन सरकार का बजट मध्यम और गरीब वर्ग के हित में बड़े तोहफो के रूप में साबित हो सकता है।
जीएसटी बदलेगा अर्थव्यवस्था
केंद्र सरकार का इस साल नए वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से देश में एक कर प्रणाली के रूप में जीएसटी कानून लागू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन केन्द्र और राज्यों के बीच करदाता इकाइयों पर अधिकार का मुद्दा न सुलझने की वजह से अब जीएसटी जुलाई या अगस्त में ही लागू होने की संभावना नजर आ रही है। मसलन संसद का शीतकालीन सत्र नोटबंदी के विरोधी शोर में चला गया। अब सरकार का प्रयास होगा कि विवादित मुद्दे को जल्द सुलझाकर बजट सत्र में केन्द्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और एकीकृत जीएसटी विधेयकों को पारित करा लिया जाए। हालांकि वित्त मंत्री 16 जनवरी को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में विवादित मुद्दे को सुलझाने की कोशिश में है, जिस पर अभी संशय के बादल ही नजर आ रहे हैं। फिर भी सरकार को उम्मीद है कि जुलाई में सरकार जीएसटी कानून को लागू कर सकती है।
कैसे जुटाएगी सरकार धनराशि
सूत्रों के अनुसार आम बजट में सरकार मध्यम और गरीबों को लाभ देने के लिए जिस योजना के ऐलान पर विचार कर रही है, उस योजना में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) की जगह बेरोजगारी फायदा लाने पर विचार किया जा रहा है। ऐसी योजना इसलिए बनाई जा रही है कि यूबीआई के तहत भारत इतना धन नहीं जुटा सकती है, जिसे अन्य देशों की तरह भारत आगे नहीं बढ़ सकता। हालांकि यूबीआई में समाजिक सुरक्षा देने के रूप में जरूरतमंद लोगों को एक तय रकम देने का प्रावधान है। यह भी माना जा रहा है कि सरकार गरीबों व बेरोजगारों के लिए संभावित योजना को आगे बढ़ाता है तो उसमें धनराशि जुटाने के लिए सरकार कुछ क्षेत्रों में सब्सिड़ी को बंंद कर सकती है। सरकार के सामने जीडीपी बढ़ाने की भी चुनौती होगी।
पहले बजट पेश करने का फायदा
केंद्र सरकार ने वर्ष 2017-18 के केंद्रीय बजट पहली बार एक फरवरी को पेश करने का फैसला इसलिए किया है कि बजट प्रक्रिया को मार्च माह में पूरी करके उसे नए वित्तीय वर्ष यानि एक अपै्रल को लागू किया जा सके। देश के सभी राज्यों को वार्षि बजट का आवंटन समय होने से सभी योजनाओं पर एक अप्रैल से अमल करने की दिशा में सरकार ने यह फैसला लिया है। हालांकि पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल पूरी तरह से बिफरे हुए हैं, जिनकी अर्जी से बजट का मुद्दा चुनाव आयोग में भी फैसले के लिए विचाराधीन है।
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