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सेना ने सियाचिन ग्लेशियर में शुरू किया सफाई अभियान, अब तक निकाला इतना कचरा

कूड़े को नीचे लाने के लिए कुली, खच्चरों और सेना के हेलिकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है।

सेना ने सियाचिन ग्लेशियर में शुरू किया सफाई अभियान, अब तक निकाला इतना कचरा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' की झलक जमीन के अलावा आसमान छूती हिमालय की बर्फीली चोटियों यानि सियाचिन ग्लेशियर पर भी दिखाई देने लगी है। सेना ने ग्लेशियर की सफाई के लिए 16 दिन के स्वच्छता अभियान का आगाज कर दिया है।

इसकी शुरूआत बीते 17 सितंबर को सियाचिन ग्लेशियर के बेस कैंप से की गई है, जिसकी ऊंचाई 9 हजार 500 फीट है। अभियान में सियाचिन ब्रिगेड के कुल करीब 4 हजार जवानों को लगाया गया है।

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अभियान का समापन 2 अक्टूबर को बेस कैंप पर ही किया जाएगा। सियाचिन ग्लेशियर पर स्वच्छता अभियान बीते 2014 से चल रहा है। इसमें अब तक 63 टन से अधिक कचरे को बेस कैंप पर लाकर उसका निपटान किया जा चुका है।

गौरतलब है कि सियाचिन ग्लेशियर में बारह महीने फौज की तैनाती से यहां भी काफी मात्रा में कूड़ा-कचरा फैलने से गंदगी होने लगी है।

यह ग्लेशियर हिमालय की पूर्वी काराकोरम पर्वतमाला में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास स्थित है और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है।

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सेना के एक अधिकारी ने हरिभूमि को बताया कि ग्लेशियर में स्वच्छता अभियान चलाना अपने आप में एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है।

इसलिए सियाचिन ब्रिगेड की ओर से यह योजना बनाई गई है कि ग्लेशियर की सफाई चरणबद्ध ढंग से की जाएगी।

इसमें ऐसी प्रक्रिया अपनायी जाएगी। जिससे ग्लेशियर के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और अभियान को भी सफलतापूर्वक समाप्त किया जा सके।

कार्यक्रम सियाचिन बेस कैंप से शुरू हो चुका है। इसके बाद ग्लेशियर की ऊंचाई पर स्थित फॉरवर्ड पोस्ट से लेकर इसके अंतिम छोर तक मौजूद तमाम सैन्य पोस्ट की सफाई की जाएगी।

इन पोस्ट की समुद्रतल से ऊंचाई 9 हजार 500 फीट से लेकर 21 हजार फीट तक है। इनमें से ग्लेशियर की ज्यादातर पोस्ट पर तापमान शून्य से नीचे यानि माइन्स में रहता है।

कूड़े को जलाया नहीं जाएगा

इस पूरे अभियान के दौरान अलग-अलग पोस्ट से इकट्ठा किया गया कूड़ा-कचरा ग्लेशियर में तैनात तमाम सैन्य यूनिटें एक पूर्व निधार्रित स्थान पर एकत्रित करेंगी और फिर उसका निपटारा किया जाएगा।

अभियान के दौरान जैविक व अजैविक कूड़े को अलग-अलग छांटकर उसका निपटान ऐसी जगह पर किया जाएगा। जहां से नदी के स्रोत व मानव आबादी काफी दूरी पर हो।

इस बात के सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार के कूड़े को जलाया नहीं जाएगा। क्योंकि इससे ग्लेशियर के वातावरण पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

ऐसे नीचे आएगा कचरा

ग्लेशियर पर एकत्रित किए जाने वाले कूड़े-कचरे में पैकिंग मेटीरियर, बंदूक की नली, मानव अपशिष्ट, खाली तोपखाने, प्लास्टिक की सीट, पैराशूट, गोला-बारूद के बक्से जैसी चीजें शामिल हैं। कूड़े को नीचे लाने के लिए कुली, खच्चरों और सेना के हेलिकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है।

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