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अर्जन सिंह को सोमवार को दी जाएगी अंतिम विदाई, रिटायरमेंट के बाद भी नहीं हुए थे रिटायर

मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को पाकिस्तान के लायलपुर (अभी फैसलाबाद) में हुआ था।

अर्जन सिंह को सोमवार को दी जाएगी अंतिम विदाई, रिटायरमेंट के बाद भी नहीं हुए थे रिटायर

वायुसेना में युगपुरुष की संज्ञा से सुशोभित मार्शल अर्जन सिंह का 98 वर्ष की आयु में यहां राजधानी के सैन्य अस्पताल (आर एंड आर) में निधन हो जाने के बाद समूचे देश में दुख की लहर सी दौड़ गई है। मार्शल का अंतिम संस्कार सोमवार को दिल्ली के 'बरार स्क्वायर' में किया जाएगा।

लेकिन उनकी प्रतिष्ठित छवि, काम के प्रति लगन-समर्पण, दमदार नेतृत्व क्षमता और चुनौतियों के दौर में वायुसेना के आधुनिकीकरण में निभाए गए अमूल्य योगदान की वजह से मार्शल का नाम इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा।

वायुसेना के वरिष्ठ सेवानिवृत अधिकारी एयर मार्शल बी़ के़ पांडेण्य ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि मार्शल अर्जन सिंह वायुसेना की एक प्रतिष्ठित शख्सियत थे। साथ ही उन्हें वायुसेना का एकमात्र लंबी दीर्घआयु प्राप्त अधिकारी भी माना जाता है।

जो अपने जीवनकाल के बाद भी वायुसेना परिवार में एक मार्गदर्शक के रुप में हमेशा जीवित रहेंगे। मार्शल वायुसेना का हिस्सा तब बने थे। जब देश आजाद भी नहीं हुआ था। ब्रिटिश भारत में पाकिस्तान के साहिवाल के मांटगोमरी में शिक्षा लेने के बाद मार्शल 1938 में रॉयल एयरफोर्स कॉलेज क्रैनवेल (लंदन) में प्रवेश किया।

इसके बाद दिसंबर 1939 में एक पायलट अधिकारी के रुप में नियुक्त किया गया। मार्शल सबसे कम उम्र 44 वर्ष में वायुसेनाप्रमुख बने। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें मार्शल की उपाधि के साथ पांच सितारा रैंक से सम्मानित किया। इसके बाद मार्शल कभी सेवानिवृत नहीं हुए और हमेशा वायुसेना में एक्टिव बने रहे। कैसे अर्जन सिंह ने पाकिस्तान और चीन को चटाई धूल इसके लिए आपको अगली स्लइड में जाना होगा...

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