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हिसाब 2015: भारत-अमेरिका के संबंधों में आई मजबूती, पांच गुना बढ़ा व्यापार

भारत-अमेरिका संबंध में जो बात हमें अब दिखाई दे रही है, वह वर्षों के प्रयास का परिणाम है।

हिसाब 2015: भारत-अमेरिका के संबंधों में आई मजबूती, पांच गुना बढ़ा व्यापार

वाशिंगटन. वर्ष 2015 को भारत-अमेरिका के रिश्तों में बदलाव लाने वाले साल के तौर पर याद किया जाएगा जिसने शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर सक्रिय संवाद के नए आयाम की दिशा तय की और साथ ही वैश्विक सुरक्षा का आधार बनने के लिए तैयार रक्षा साझेदारी का विकास हुआ। साल की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के साथ हुई। ओबामा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में शिरकत करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। वहीं, असैन्य परमाणु संधि के विवादपूर्ण लंबित मामलों को भी सुलझाया जा सका। ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों के बीच एक हॉटलाइन की स्थापना करने व रक्षा साझेदारी के समझौते के नवीकरण का फैसला किया।

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बहरहाल, कृषि, दवा क्षेत्र, बौद्धिक संपदा और एच-1बी वीजा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण व्यापारिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तीखे मतभेद बने हुए हैं लेकिन पिछले साल की तरह ये सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए और न ही इनसे द्विपक्षीय संबंधों को चुनौती मिलने का खतरा सामने आया। दोनों देशों के अधिकारी अब नियमित रूप से बातचीत करते हैं और वे इस बात पर विचार करते हैं कि इन मतभेदों से किस तरह सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटा जाए।
वर्षों के प्रयास का परिणाम
भारत-अमेरिका संबंध में जो बात हमें अब दिखाई दे रही है, वह वर्षों के प्रयास का परिणाम है। असल में यह दशकों की मेहनत का परिणाम है, जिसने दोनों ही देशों को महत्वपूर्ण नतीजे दिए हैं। बीता वर्ष, विशेष तौर पर बदलाव लाने वाला रहा है। इस साल भारत और अमेरिका ने अब तक की पहली रणनीतिक एवं व्यवसायिक वार्ता आयोजित की, जिसमें सरकार की पूरी सोच को लेकर आया गया।
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