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Missile Man: डॉ. कलाम की तीसरी पुण्यतिथि, जानें मिसाइल मैन बनने के अनसुने किस्से

भारत के दसवें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की तीसरी पुण्यतिथि पर देशभर से श्रद्धांजिल समर्पित की जा रही है। आज के दिन हमारे मिसाइल मैन कलाम साहब हमें अलविदा कह कर चले गए थे।

Missile Man: डॉ. कलाम की तीसरी पुण्यतिथि, जानें मिसाइल मैन बनने के अनसुने किस्से

भारत के दसवें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की तीसरी पुण्यतिथि पर देशभर से श्रद्धांजिल समर्पित की जा रही है। आज के दिन हमारे मिसाइल मैन कलाम साहब हमें अलविदा कह चले गए थे। कलाम साहब हमेशा लोकप्रिय रहें। इनका स्वभाव और काम हमेशा हमारे लिए प्रेरणादायक रहेगा।

वैसे तो कलाम साहब ने काफी काम किया लेकिन मिसाइल मैन के तौर पर वे चर्चा में आ गए। आज इनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं कि आखिरकार एक अखबार बांटने वाला कॉमन मैन कैसे मिसाइ मैन बन गया। स्कूल के बाद मंदिर-मस्जिद में जाकर बैठने वाला बालक कैसे अंतरिक्ष की उड़ान भरने लगा।

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वैज्ञानिक और इंजीनियर कलाम ने 2002 से 2007 तक 11वें राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की थी। मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्ध कलाम देश की प्रगति और विकास से जुड़े विचारों से भरे व्यक्ति हैं। मिसाइल के क्षेत्र में कलाम के योगदान को देखिए एक नजर में-

मिसाइल मैन कलाम से जुड़ी खास बातें

1- बचपन से ही इनकी रूचि गणित पढ़ने में रही।

2- कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं। वो कहते हैं, वो हमारे अच्छे टीचर्स में से थे। एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? फिर इसके बाद टीचर ने उनको चिड़ियों की बनावट समझाई और यहीं से एयरोस्पेस के सपनों को गति मिली।

3- 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे। इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया।

4-1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया।

5- कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया। उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं।

6- 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे। कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे।

7- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया। कलाम ने विजन 2020 दिया। इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई।

8- 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया।

9- कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया।

10- स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई।

11- जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था। पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए।

12- सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया।

13- 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई।

14- ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागी जा सकती है।

15- इस सफलता के साथ ही कलाम को मिसाइल मैन के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गए। इनके सपने को जानने के लिए इनकी किताब 'अग्नि की उड़ान' पढ़ सकते हैं। इनको पद्मविभूषण और भारत रत्न से नवाजा गया।

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