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कम जगह में गार्डनिंग करने का शानदार तरीका, जानिए गमले में कैसे लगाएं पौधे

गमलों में लगे पौधे घर की खूबसूरती को बढ़ाते हैं,लेकिन यह तभी खिले-खिले रहते हैं, जब इनकी सही देखभाल की जाए। जानिए, गमलों में लगाए जाने वाले पौधों की देखभाल का सही तरीका।

कम जगह में गार्डनिंग करने का शानदार तरीका, जानिए गमले में कैसे लगाएं पौधे

अधिकतर शहरों के फ्लैट्स में जगह बहुत सीमित होती है। ऐसे में जिन महिलाओं को गार्डनिंग का शौक होता है, वे बालकनी में ही गमलों में तरह-तरह के पौधे लगाती हैं। लेकिन कई बार गमलों में लगे पौधे ठीक से फलते-फूलते नहीं हैं या सड़ जाते हैं। ऐसा पौधे की अच्छी तरह केयर न करने की वजह से होता है।

पानी की सही मात्रा

सबसे पहले यह नोटिस करें कि आप पौधों में कितना पानी देती हैं। दरअसल, पौधों में ज्यादा पानी देने से वे खराब हो जाते हैं, क्योंकि मिट्टी में लगातार पानी की मौजूदगी उनकी जड़ों की वृद्धि पर बुरा असर डालती हैं, पौधों के कोमल तंतु पानी की अधिकता से सड़ जाते हैं।

ज्यादा पानी के कारण पौधों की पत्तियों के सिरे भूरे रंग के हो जाते हैं। इसी तरह पानी की कमी होने से भी गमले में लगे पौधे खराब हो जाते हैं। ऐसे में पौधों को गमलों में लगाने के बाद किस पौधे को कितने पानी की जरूरत है, इसकी समुचित जानकारी होनी चाहिए।

रोशनी हर पौधे को फलने-फूलने के लिए धूप की जरूरत होती है। धूप न मिलने से पौधे खराब हो जाते हैं। पौधे को कितनी धूप की जरूरत है, इसकी जानकारी अवश्य रखें। आपके घर में धूप आने की सुविधा है या नहीं, इसके अनुसार ही पौधे का चयन करें। कुछ पौधों को ज्यादा धूप की जरूरत होती है, जबकि कुछ पौधे कम धूप में भी फलने-फूलने लगते हैं।

खाद

ज्यादा खाद या कम खाद से भी पौधों की ग्रोथ पर असर पड़ता है। अगर गमले में खाद ज्यादा डाल दी जाए तो इसका असर धीरे-धीरे पौधों की जड़ तक पहुंच जाता है और पौधे मर जाते हैं। खाद कम है या ज्यादा हो तो इसका असर सबसे पहले पत्तियों पर नजर आता है।

किसी विशेष पोषक तत्व की अधिकता से पत्तियों में पीले धब्बे दिखने लगते हैं। कई बार पौधों में कीड़े और फंगस भी लग जाते हैं। इससे भी पौधे पूरी तरह खराब हो जाते हैं, इसका भी ख्याल रखना आवश्यक है।

मिट्टी

गमले में पौधा लगाते वक्त यह सुनिश्चित जरूर करें कि गमले में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी की गुणवत्ता सही है। ज्यादा क्षारीय या खारे पानी के इर्द-गिर्द की मिट्टी का, पौधों के लिए इस्तेमाल न करें। ऐसी मिट्टी की वजह से पौधे अच्छी तरह पनपते नहीं हैं।

प्रदूषण

मौसम बदलने के साथ-साथ पर्यावरण में होने वाले बदलाव भी पौधों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। प्रदूषण के कारण नई पत्तियों का गिरना, रंग में बदलाव, पौधों का विकास रुकना, मिट्टी में प्रदूषण, मिट्टी में क्षारीय अधिकता, रसायनों के दुष्प्रभाव से गमले में लगे पौधों को बचाए रखें। ऐसे किसी जगह गार्डनिंग न करें, जहां प्रदूषण ज्यादा हो।

रखें ध्यान

1.गमले में पौधा लगाने से पहले जांच लें कि वो स्वस्थ है या नहीं।

2.जिस गमले में पौधा लगा रही हैं, देख लें कि गमले के नीचे का छेद खुला है या नहीं।

3.पौधों को शाम के समय पानी दें। इससे उन्हें पानी को सोखने में काफी समय मिल जाता है और अगले दिन वह सूर्य की रोशनी को सहने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन पानी देते वक्त मौसम का ध्यान जरूर रखें। मिट्टी सूखी दिखने पर ही पौधे में पानी दें।

4.अगर कोई पौधा खराब हो रहा है तो विशेषज्ञ की सलाह लें।

5.गमलों को एसी के आस-पास न रखें।

6.पौधे को तेज हवा के असर से बचाने के लिए बैरियर लगाएं, कोमल और कमजोर तने वाले पौधों को सहारा देने के लिए मजबूत बांस की खपचियों का इस्तेमाल करें।

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