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कर्ज में डूबी अंबानी की कंपनी, आरकाॅम की संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने पर लगी रोक

आर्बिट्रेशन कोर्ट ने कर्ज के बोझ से दबी अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और उनकी दो अन्य कंपनियों पर बिना उसकी मंजूरी के किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी है।

कर्ज में डूबी अंबानी की कंपनी, आरकाॅम की संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने पर लगी रोक
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अनिल अंबानी को मंगलवार को तगड़ा झटका लगा। एक आर्बिट्रेशन कोर्ट ने कर्ज के बोझ से दबी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और उनकी दो अन्य कंपनियों पर बिना उसकी मंजूरी के किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने इरिक्सन की एक याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया है, जिसने अपने बकाये के भुगतान सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया था। कोर्ट 9 जून को अगली सुनवाई करेगा।

आर्बिट्रेशन कोर्ट के इस फैसले की खबर फैलते ही आरकॉम के स्टॉक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। स्टॉक 5 फीसदी गिरकर 26.35 रुपए पर बंद हुआ। सोमवार 5 मार्च को आर्बिट्रेशन कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, ‘हम दावेदार (आरकॉम) और इससे संबद्ध कंपनियों को आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल की विशेष अनुमति/छूट के बिना किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण, अलगाव, भार या निपटान से रोकने का निर्देश देते हैं।'

एरिक्सन का कहना है कि अगर आरकॉम को अपनी संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने की अनुमति मिल जाती है तो वह शेल कंपनी में परिवर्तित हो जाएगी और एरिक्सन उससे अपना बकाया कभी नहीं वसूल पाएगा। आरकॉम के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इस आदेश के खिलाफ जल्दी ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। प्रवक्ता ने कहा, ‘हम मामले जो समझ रहे हैं और इस निर्देश के खिलाफ हम माननीय उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।'

स्वीडन की टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी इरिक्सन ने 1,155 करोड़ रुपए के बकाये को लेकर आरकॉम के खिलाफ बीते साल सितंबर, 2017 में याचिका दायर की थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस पर मार्च, 2017 तक बैंकों का 7 अरब डॉलर (लगभग 45 हजार करोड़ रुपए) का कर्ज था, जब उन्होंने अपने कर्ज के आंकड़े सार्वजनिक किए थे।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार, जस्टिस वीएस सिरपुरकर और जस्टिस एसबी सिन्हा ने यह आदेश दिया है। ये सभी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रतिवादी (एरिक्सन) ने एक तार्किक बात कही है और ट्राइब्यूनल की राय है कि अभी कोई राहत देने से मना करने पर इसे कभी भरपाई नहीं हो पानेवाला नुकसान हो सकता है।

आरकॉम की मुश्किलें बढ़ीं

आर्बिट्रेशन कोर्ट के इस आदेश को आरकॉम के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है, जिसने अपने कर्ज को कम करने के लिए दिसंबर, 2017 में अपनी संपत्ति रिलायंस जियो को बेचने का एक प्लान पेश किया था। टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी इरिक्सन की भारतीय सब्सिडियरी ने आरकॉम के देश भर में स्थित नेटवर्क को ऑपरेट और प्रबंधन के लिए 7 साल का करार किया था। इससे पहले आरकॉम को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले विदेशी लेंडर चाइना डेवलपमेंट बैंक ने जियो डील सहित अपने कर्ज में कटौती के प्लान पेश किए जाने के बाद उसके खिलाफ अपनी इनसॉल्वेंसी की पिटीशन वापस ले ली थी।

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