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आंध्र प्रदेश: आखिर कैसे बढ़ा मोदी और नायडू के बीच विवाद, जानें क्या है विशेष राज्य का दर्जा

टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नायडू ने बैठक के दौरान एनडीए से अलग होने का फैसल किया। बता दें कि एनडीए और देलगू देशम पार्टी के बीच करीब 4 साल पहले गठबंधन हुआ था।

आंध्र प्रदेश: आखिर कैसे बढ़ा मोदी और नायडू के बीच विवाद, जानें क्या है विशेष राज्य का दर्जा

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने की जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जहां एक तरफ तेलगू देशम पार्टी ने एनडीए से अपना समर्थन ले लिया है। वहीं इसके बाद सीएम नायडु अपनी मांग तेज कर दी है।

4 साल पहले हुआ था गठबंधन

कल तक बीजेपी और तेलगू देशम पार्टी एक दूसरे के बेहद करीबी थे। लेकिन अब सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद दोनों खेमों में दरार आ गई है। एनडीए और देलगू देशम पार्टी के बीच करीब 4 साल पहले गठबंधन हुआ था।

टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नायडू ने पार्टी की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली कमेटी पोलित ब्यूरो के साथ बैठक की और जिसके बाद एनडीए से अलग होने का फैसल किया।

जाहिर है 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसे में टीडीपी का एनडीए से समर्थन वापस लेना केंद्र सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। टीडीपी ने केंद्र सरकार को धमकी देते हुए कहा है कि वह संसद में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाएंगे।

पीएम मोदी ने दिया था आश्वासन

तेलगू देशम पार्टी का गठबंधन से अलग होने जाने की मु्ख्य मुद्दा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग थी। आंध्र प्रदेश के सीएम और पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के लिए हमेशा विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग केंद्र सरकार से करते रहे। पीएम मोदी ने उनकी इस मांग पर विचार करने का भरोसा दिया था।
काफी समय बीत जाने के बाद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग चंद्रबाबू नायडू ने एक बार फिर की। लेकिन बीजेपी सरकार ने उनकी मांग को कोई तवज्जो नहीं दी।
मीडिया के मुताबिक, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए चंद्रबाबू ने 3 बार पीएम मोदी से मुलाकात करने का समय मांगा, लेकिन हर बार उन्हें निराशा मिली। अपनी मांग की अनदेखी के चलते टीडीपी प्रमुख ने घोषणा की अगर केंद्र सरकार उनकी मांग को नहीं मानेगी। तो वह एनडीए में शामिल अपनी पार्टी का समर्थन वापस ले लेंगें। उन्होंने आगे कहा था कि केंद्र सरकार में शामिल टीडीपी के दो मंत्री भी इस्तीफा देंगे।

कैसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा

भारतीय संविधान में किसी भी राज्य को विशेष दर्जा देने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन अगर कोई राज्य किसी दूसरे राज्य के संसाधनों के मुकाबले काफी पिछडा है तो ऐसे राज्य को केंद्र सरकार विशेष राज्य का दर्जा देने का फैसला करती है।

विशेष राज्य के फायदे

विशेष राज्य की श्रेणी में शामिल राज्यों को केंद्र की तरफ से दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा सहयोग दिया जाता है। यह सहयोग टैक्स और अन्य योजनाओं के मामले में मुहैया किया जाता है। विशेष राज्य का दर्जा मिलने वाले राज्य को केंद्र सरकार कोई सहायता 90 फीसदी अनुदान के रूप में और 10 फीसदी कर्ज के रूप में देती है।

कब मिला पहली बार विशेष राज्य का दर्जा

साल 1969 में विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का चलन शुरू हुआ। इस दौरान 5वें वित्तीय आयोग ने तय किया था कि उन राज्यों को केंद्र की तरफ से विशेष सहयोग दिया जाएगा, जो पिछड़े हुए हैं।
बता दें अप्रैल 2014 में तेलगू देशम पार्टी ने एनडीए में शामिल हुई थी। उस समय टीडीपी और बीजेपी ने लोकसभा और आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ सीटों का तालमेल भी किया था।

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