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तीन दशक से ज्यादा समय बाद भी न्याय की आस में पीड़ित, 1984 दंगा पीड़ितों के लिए एमनेस्टी इंडिया शुरु किया अभियान

सिख विरोधी दंगे 1984 के पीड़ित तीन दशक बाद भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। एमनेस्टी इंडिया की ओर से उनके न्याय के लिए देशभर से मिस्ड कॉल (08030456880) के जरिए समर्थन मांगा जा रहा है।

तीन दशक से ज्यादा समय बाद भी न्याय की आस में पीड़ित, 1984 दंगा पीड़ितों के लिए एमनेस्टी इंडिया शुरु किया अभियान

सिख विरोधी दंगे 1984 के पीड़ित तीन दशक बाद भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। एमनेस्टी इंडिया की ओर से उनके न्याय के लिए देशभर से मिस्ड कॉल (08030456880) के जरिए समर्थन मांगा जा रहा है। इस मानवाधिकार संगठन के द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर लोगों से समर्थन की अपील की जा रही है।

बता दें कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 31 अक्टूबर से 3 नवंबर 1984 तक हिंसक भीड़ ने 3000 से अधिक सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या कर ली थी। कई सिख पुरुषों की गर्दन को आग से जलते हुए टायर रखे गए थे, जबकि अन्य को गोली मारकर हत्या कर दी गई। सिख महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था और उन पर हमला किया गया।

एक सरकारी नियुक्ति न्यायिक आयोग (Govt Judicial Commission) ने हिंसा के बारे में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि इस बात का सबूत था कि हमलावरों ने सार्वजनिक बसों का इस्तेमाल किया था।
इस रिपोर्ट में गया था कि हमले पुलिस के डर के बिना व्यवस्थित तरीके से किए गए थे और नरसंहार को संगठित नरसंहार के रुप में वर्णित किया गया।
वे भारतीय इतिहास के अंधेरे दिनों के रुप में रहते हैं। 1984 का नरसंहार एक राष्ट्रीय शर्म की बात थी और उसके बाद तीन दशकों तक पीड़ितों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
11 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को आदेश दिया कि एसआईटी में एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य शामिल होंगे। हालांकि, लगभग पांच महीने बाद एसआईटी का तीसरा सदस्य अभी भी नियुक्त नहीं किया गया है।
एस गुरलाद सिंह कहलोन की ओर से पिछली एसआईटी के कामकाज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को आदेश दिया था कि अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट जमा करें।
सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई थी, हालांकि याचिकाकर्ता कहलोन ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया को बताया कि सुनवाई नहीं हुई और यह गर्मियों की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट के खुलने के बाद ही होगा।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया अपनी फर्म के साथ मानवाधिकारों के लिए काम करता है और पीड़ितों के न्याय के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहा है। 1984 के पीडि़तों के लिए राष्ट्रीय समर्थन मांगने के लिए यह अभियान शुरु किया है।

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