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Exclusive: अमिताभ कांत ने बताया- पीएम की यात्रा के बाद ''बीजापुर विकास मॉडल'' देशभर में होगा लागू

निति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया कि पीएम मोदी की बीजापुर यात्रा के बाद बीजापुर का वेलनेस सेंटर देशभर के लिए मॉडल के तौर पर स्थापित होगा। ऐसे ही एक हजार वेलनेस सेंटर समूचे देश में पहले चरण में खोले जाएंगे। वर्ष 2022 तक डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर्स खुलेंगे।

Exclusive: अमिताभ कांत ने बताया- पीएम की यात्रा के बाद बीजापुर विकास मॉडल देशभर में होगा लागू
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शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजापुर के जांगला क्षेत्र में देश को वो सौगात देंगे जिसकी कल्पना ही केवल आजतक की जाती रही है। एक आधुनिक तकनीकी से लैस स्वास्थ्य शिविर, वेलनेस सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे जिसमें जच्चा-बच्चा की देखभाल से लेकर, कैंसर जैसी बीमारी के ईलाज का प्रावधान होगा। जरूरत पड़ी तो संबंधित मरीज को देश के अन्य अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था भी होगी। बीजापुर का वेलनेस सेंटर देशभर के लिए मॉडल के तौर पर स्थापित होगा।

ऐसे ही एक हजार वेलनेस सेंटर समूचे देश में पहले चरण में खोले जाएंगे। वर्ष 2022 तक डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर्स खुलेंगे। प्रधानमंत्री बीजापुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का उद्घाटन स्थानीय आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए करेंगे। कुल 9 बैंक बीजापुर में खुलने हैं। 18 पोस्ट ऑफिस खोले जाने हैं। पूरे बस्तर में 33 नए बैंक स्थापित किए जाने हैं। प्रधानमंत्री, रूरल बीपीओ का मुआयना करेंगे। टैबलेट से लैस मॉडल के रूप में स्थापित आंगनबाड़ी कर्मियों का कामकाज देखेंगे।

उसमें चल रहे पोषण अभियान के कारण बच्चों में आए आमूलचूल परिवर्तन को खुद अनुभव करेंगे। वहां चल रहे शहद उद्योग को देखेंगे। धान की उन्नत किस्म पैदा करनेवाले किसानों से मिलेंगे। कुछ स्थानीय लोगों के बीच इमली से बीज निकालने वाली मशीनें वितरित करेंगे। अस्पताल में लगाई गई नई डायलिसिस मशीन और दल्ली राजहरा-भानुप्रतापपुर रेललाइन का उद्घाटन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये करेंगे।

उसके बाद अंत में एक बड़ी आमसभा का आयोजन है। समूचे कार्यक्रम का तानाबाना कुछ यूं बुना गया है कि सुरक्षा के लिहाज से प्रधानमंत्री जांगला के उसी 100 मीटर की परिधि में ही मेल-मुलाकात, बातचीत, आमसभा सब कर सकें। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने वाले शिल्पकार नीति आयोग के सीईओ अमिताभकांत ने हरिभूमि से चर्चा करते हुए हर सवाल का बेबाक जवाब दिया..

नीति आयोग की कसौटी पर उप्र का बहराइच नंबर वन था बीजापुर दूसरे पायदान पर था, तो क्या छग में चुनाव के कारण हाईप्रोफाइल कार्यक्रम के लिए बीजापुर का चयन किया गया?

ये बात आपकी सही है कि देशभर के पिछड़े हुए 115 जिले में विभिन्न कसौटियों पर बहराइच नंबर एक पर रहा, मगर बीजापुर बेस्ट-प्रैक्टिसेस, डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान और डेल्टा रैंकिंग और अन्य 28 डेवलपमेंट-इंडीकेटर्स में अव्वल रहा। ये ऐसी कसौटी है जो जिले के भविष्य को रेखांकित करती है। निश्चित रूप से इस जीत के लिए बीजापुर के कलेक्टर अय्याज तंबोली बधाई के पात्र हैं। उन्होंने जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड का बेहतर उपयोग कर नक्सल प्रभावित जिले को कैसे विकास के रास्ते पर दौड़ाया जा सकता है इसका नायाब उदाहरण पेश किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि आंध्र, महाराष्ट्र के बॉर्डर पर आनेवाले धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर में कभी कोई प्रधानमंत्री नहीं गए आज तक, तो हमारी कोशिश है कि देश के सुदूरवर्ती कठिन भौगोलिक क्षेत्र में स्थानीय लोगों से मिलकर प्रधानमंत्री बीजापुर का सम्मान योजनाओं के मार्फत देश की मानचित्र पर स्थापित करें।

पिछड़े 115 जिलों में छत्तीसगढ़ के दस जिले शामिल हैं..?

बीच में ही टोकते हुए..बिल्कुल ठीक। बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, कोरबा, राजनांदगांव और महासमुंद। आप ये देखिए कि अब इन पिछड़े जिलों में आगे निकलने की होड़ मची है। हर महीने नीति आयोग इनकी रैंकिंग तय करता है। विकास के मानकों पर मॉनिटरिंग सिस्टम है। मेरा मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार में कुछ करने की ललक दिखाई देती है। तत्परता दिखाई देती है।

कसौटी के मानक क्या हैं?

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर करने वालों के लिए 30 अंक, शुद्ध जल की उपलब्धता पर 20, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 10 और वित्तीय संस्थाओं और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में अच्छा करने वाले जिलों के लिए 10 अंक निर्धारित हैं। यानि कुल 100 अंकों की परीक्षा में हर महीने जितने अंक जो जिला अर्जित करता है उसके हिसाब से उनकी डेल्टा रैंकिंग तय होती है। रैंकिंग अभी हमारा सिस्टम कर रहा है। अगले महीने से ये कम थर्ड-पार्टी के तहत टाटा और बिल गेट्स ट्रस्ट करेगा।

यूपीए सरकार में भी नक्सल प्रभावित 88 जिलों का चयन कर विकास के लिए अलग फंड की व्यवस्था की गई थी अब तो ये संख्या 115 जिलों तक बढ़ गई ?

उस समय इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान के तहत 88 जिलों के विकास की योजना बनी थी। उसी के साथ बीआरजीए योजना के तहत 274 जिलों का भी चयन हुआ था। वो योजना और इस योजना में जमीन आसमान का अंतर है। उस समय योजनाओं की न तो मॉनिटरिंग का कोई तंत्र था और न ही आपसी प्रतियोगिता, एकदूसरे से विकास में आगे निकलने की होड़ थी। उस समय यूटीलाइजेशन-सर्टिफिकेट के आधार पर फंड जारी होता था अभी काम जमीन पर देखने और मॉनिटरिंग सिस्टम की हरी झंडी के बाद फंड रीलीज होता है।

कोरबा को दिखाया गया है कि तेजी से विकसित हो रहा है जब कि केंद्र सरकार के आंकड़े कहते हैं कि वहां 40 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं?

आपने जिस आंकड़े की बात की वो देशभर के 716 जिलों की कसौटी पर कसे गए। नीति आयोग ने जिस आधार कोरबा को आगे रखा वो इन 115 पिछड़े जिलों के बीच बढिया प्रदर्शन के आधार पर है, दोनों में अंतर समझिये।

चुनाव वाले राज्य में बाबा साहेब की जयंती पर पीएम का कार्यक्रम बड़े राजनीतिक मैसेज की तैयारी नहीं है?

इससे बढ़िया और शानदार दिन क्या हो सकता था? भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री आदिवासी परिवारों के बीच हों। उनके उत्थान की बात कर रहे हों। उन्हें विकास के रास्ते पर चलने को प्रेरित कर रहे हों। उन्हें हर वो मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हों जिनके वो हकदार हैं। ये राजनीतिक नहीं, समाजिक मैसेज है। विकास के रास्ते पर जो पिछड़ गए उन्हें हाथ पकड़कर साथ चलने का मैसेज है।

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