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चीन के खिलाफ आवाज उठाने वाले विश्व के अकेले नेता हैं नरेंद्र मोदीः अमेरिकी थिंक टैंक

अमेरिकी थिंक टैंक का दावा चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ मोदी ही विश्व के ऐसे अकेले नेता है जिन्होंने आवाज उठाई है।

चीन के खिलाफ आवाज उठाने वाले विश्व के अकेले नेता हैं नरेंद्र मोदीः अमेरिकी थिंक टैंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सख्त विदेश नीति के कारण पूरी दुनिया में चर्चा में रहे हैं। अमेरिकी संसद के सामने चीनी मामले पर नजर रखने वाले एक थिंक टैंक ने कहा है कि चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड के खिलाफ मोदी ही विश्व के ऐसे अकेले नेता है जो खड़े हुए है।

इस थिंक टैंक ने कहा हाल ही में चीन के साथ हुए डोकलाम विवाद में भी मोदी सरकार ने सख्त रूख दिखाया था। 73 दिन तक चले इस विवाद में भारत और चीन के सैनिक एक दूसरे के सामने खड़े रहे थे। बाद में शातिंपूर्वक दोनों देशों ने अपने सैनिकों को सीमा से हटा लिया था।

मोदी सरकार ने जताई थी आपत्ति-

अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटिजी के डाटरेक्टर माइकल पिलस्बरी ने कहा अभी तक अमेरिका प्रशासन की तरफ से ओबीओआर के मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा गया है।

लेकिन मोदी सरकार की तरफ से चीन के इस महात्वाकांक्षी परियोजना पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई है। पिलस्बरी ने कहा कि कुछ हद तक ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चीन का यह पॉजेक्ट भारतीय संप्रभुता का उल्लंघन करता है।

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क्या है चीन का OBOR प्रॉजेक्ट

गौरतलब है कि चीन, पाकिस्तान और क्षेत्र के कई देशों के साथ मिलकर वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर मिलकर काम कर रहा है। इस परियोजना में पीओके, गिलगित बालटिस्तान के कुछ इलाकों के शामिल होने को लेकर भारत इसका विरोध कर रहा है।

चीन का दावा है कि इस परियोजना के जरिए दुनिया के बड़े हिस्से को आर्थिक गलियारे से जोड़ा जा सकेगा। चीन की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत इस परियोजना में शामिल नहीं है।

अमेरिका समेत विश्व के बड़े पश्चिमी देश खुद को इस परियोजना से दूर रखे हुए है। यह कॉरिडोर पीओके से होकर गुजरेगा, इसलिए भारत ने इस पर आपत्ति जताई है।

भारत अमेरिका सबसे बड़ा रक्षा साझेदार-

अभी हाल ही मे मनीला मे हुए आसियान सम्मेलन में मोदी और ट्रंप की मुलाकात हुई थी। जिसमे ट्रंप ने भारत को अमेरिका के सबसे बडे रक्षा साझेदार के रूप में मान्यता दी थी। ट्रंप ने भारत अमेरिका के महान लोकतंत्र होने के साथ-साथ विशाल सेना की जरूरत पर भी बल दिया था।

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