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मोदी के आर्थिक सुधारों पर लट्टू अमेरिका

अमेरिका स्थित भारतीय कंपनियों ने 52,000 अमेरिकी नागरिकों को रोजगार भी दिया है।

मोदी के आर्थिक सुधारों पर लट्टू अमेरिका
वॉशिंगटन. जीएसटी बिल पास होने और एफडीआइ समेत अन्य आर्थिक सुधारों के बाद अमेरिका मोदी सरकार से खुश दिखाई दे रहा है। भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की तत्परता दिखाते हुए अमेरिका ने रविवार को कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार 109 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।
अमेरिका ने कहा कि जीएसटी विधेयक पारित होने से भारत में कारोबार का माहौल और सुधरेगा। अमेरिकी कंपनियों के लिए दुनिया की सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में कारोबार करना आसान होगा। हालांकि अमेरिका ने भारत के कारोबारी माहौल को लेकर चिंता भी जताई है।
सोमवार से भारत के तीन दिनों के दौरे पर आ रहीं अमेरिका की वाणिज्य मंत्री पेन्नी प्रित्जकर ने कहा कि ट्रैवल एंड टूरिज्म और सब-नेशनल एन्गेजमन्ट जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच 2017 में वित्तीय कारोबार जोर पकड़ेगा। हमारा फोकस अब चेन्नई से चाल्र्सटन के बीच करार करने का है। प्रित्जकर ने कहा कि बीते 7.5 सालों में ओबामा प्रशासन ने दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध बढ़ाया है और उनकी मजबूत स्थिति को महसूस किया है।
प्रित्जकर ने भरोसा जताया कि भारत की तेजी से बढ़ती इकॉनमी और मोदी सरकार की ओर से जीएसटी, बैंकरप्सी बिल और एफडीआइ नियमों मे ढील जैसे सुधारवादी कदमों से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होंगे। प्रित्जकर ने दोनों देशों के बीच लोगों की बढ़ती आवाजाही के चलते टूर एंड ट्रैवल्स में निवेश की संभावनाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई। दोनों देशों की बीच हर साल करीब 10 लाख लोग हर साल यात्रा करते हैं। प्रित्जकर ने कहा कि यह संख्या बहुत अधिक है, लेकिन इसमें निश्चित तौर पर और अधिक इजाफा हो सकता है।
अमेरिकी मंत्री ने कहा, दोनों देश व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी का लाभ ले रहे हैं। 2005 के 37 अरब डॉलर के स्तर से बढ़ते हुए भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2015 में 109 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। प्रित्जकर ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियां एक दूसरी की इकॉनमी में रेकॉर्ड इन्वेस्टमेंट कर रही हैं। 2015 की बात करें तो भारत में अमेरिकी निवेश 28 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है, जबकि अमेरिका में भारत का निवेश 11 अरब डॉलर है। हालांकि अमेरिका स्थित भारतीय कंपनियों ने 52,000 अमेरिकी नागरिकों को रोजगार भी दिया है।
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