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मसूद अजहर को बैन करने के लिए UN पहुंचा ट्रंप का प्रशासन, चीन ने जताया विरोध

मसूद अजहर पर बैन को लेकर फ्रांस भी भारत के समर्थन में है।

मसूद अजहर को बैन करने के लिए UN पहुंचा ट्रंप का प्रशासन, चीन ने जताया विरोध
नई दिल्ली. पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड और पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को बैन करने के के लिए ट्रंप के नेतृत्व में नए प्रशासन ने यूएन का रुख किया है। लेकिन चीन ने इस कदम का विरोध किया है। जबकि भारत लंबे समय से पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को बैन करने की मांग कर रहा है। पिछले दिनों चीन ने यूएन में मसूद अजहर को बैन करने के प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगाने के बाद दिसंबर में स्थाई रोक लगा दी थी।
आपको बता दें अमेरिका सुरक्षा परिषद (यूएन) के 5 स्थाई सदस्यों में से एक है। अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के समर्थन से सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध कमिटी के सामने एक प्रस्ताव पेश किया है। इसमें मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करते हुए उसपर बैन की मांग की है। लेकिन मसूद पर चीन के अड़ियल रवैये में किसी तरह का बदलाव नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि सिक्यॉरिटी काउंसिल में सिर्फ चीन ही यह रोक लगा रहा है। जबकि मसूद के संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर यूएन पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है।
गौरतलब है कि यूएन द्वारा बैन लगाए जाने पर अजहर की संपत्तियां जब्त हो जातीं और उसके यात्रा करने पर पाबंदी होती। मसूद अजहर पर बैन को लेकर फ्रांस भारत के समर्थन में है। इसके साथ ही उसने जैश सरगना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंध लगवाने में भारत के साथ मिलकर काम करने का भरोसा भी दिया है। जनवरी में चार दिन की भारत यात्रा पर आए फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-मार्क एरॉल्ट ने कहा था कि सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित संगठनों की सूची में जैश का नाम पहले से ही शामिल है।
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