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जानें डॉ अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर क्यों मनाया जाता है ''महापरिनिर्वाण दिवस''

भारतीय संविधान के निर्मता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (Dr. BR Ambedkar) की पुण्यतिथि (Death Anniversary) मनाई जा रही है। हर साल 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। इस महापरिनिर्वाण दिवस भी कहा जाता है।

जानें डॉ अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर क्यों मनाया जाता है
भारतीय संविधान के निर्मता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (Dr. BR Ambedkar) की पुण्यतिथि (Death Anniversary) मनाई जा रही है। हर साल 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। इस महापरिनिर्वाण दिवस भी कहा जाता है।
इस साल 2018 में 63वां डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस (पुण्यतिथि) है। अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को गुलाम भारत में मध्य प्रदेश में स्थित महू नगर सैन्य छावनी में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं संतान थे।
वहीं अम्बेडकर का निधन 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ था। लेकिन उनका पार्थिव शरीर मुंबई में ले जाया गया था। कहते हैं कि 7 दिसंबर 1956 उनकी जब दाह संस्कार हुआ था तब दाह संस्कार के पहले उन्हें साक्षी रख उनके 10,00,000 अनुयायिओं ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली।

जानें क्यों मनाया जाता है 'महापरिनिर्वाण दिवस'

डाक्टर अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर महापरिनिर्वाण दिवस हर साल मनाया जाता है। अम्बेडकर के महान योगदान को मनाने के लिए इस दिन एससी एसटी समुदाय के लोग और कर्मचारी समारोह का आयोजन करते हैं । उन्होंने एक महान संविधान का निर्माण किया। देश को एकजुट करने में मदद की। अम्बेडकर द्वारा लिखित भारत का संविधान अभी भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है और आज भी ये कई संकटों के दौरान सुरक्षित रूप से बाहर उभरने में मदद कर रहा है। एक भारतीय विधिवेत्ता थे। वो एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी होने के साथ साथ भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है।
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