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अमरनाथ हमलाः मैंने आतंकी को लात मारी थी, नहीं तो कोई नहीं बचता

42 साल का मुकेश अस्पताल में भर्ती है। उसने उस रात को याद करते हुए कहा कि वे लोग हम सबको खत्म कर सकते थे।

अमरनाथ हमलाः मैंने आतंकी को लात मारी थी, नहीं तो कोई नहीं बचता
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अमरनाथ श्रद्धालुओं पर हुए आतंकी हमला को लेकर एक नई बात सामने आई है। जैसे बस ड्राइवर सलीम शेख ने अपनी सूझ-बूझ बस को किसी तरह वहां से निकालने में कामयाब रहा ठीक उसी तरह इसी बस में मौजूद मुकेश पटेल ने अगर एक आतंकी को लात मार कर बस में चढ़ने से ना रोका होता तो शायद बस में मौजूद सभी श्रद्धालु मारे जाते।

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42 साल का मुकेश उस बस का कंडक्टर है जिस पर आतंकियों ने हमला किया था। अभी मुकेश अस्पताल में भर्ती है। उसने उस रात को याद करते हुए कहा कि वे लोग हम सबको खत्म कर सकते थे।

पटेल ने बताया, 'जैसे ही आतंकियों ने बस पर फायरिंग करनी शुरू की, ड्राइवर को बस की स्पीड कम करनी पड़ी। जैसे ही बस की स्पीड कम हुई, एक आतंकी ने बस पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने किसी तरह दरवाजा बंद रखा। अगर उस समय दरवाजा बंद न किया गया होता तो हममें से कोई भी नहीं बचता।'

मुकेश ने बताया, 'उस रात मैं हमेशा की तरह ड्राइवर के कैबिन के पास बैठा हुआ था और बस का दरवाजा खुला था। हम अनंतनाग के पास थे, हमने देखा कि सड़क पर कुछ लोग हमारी तरफ आ रहे थे। इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते, आतंकियों ने गोलियों की बारिश करनी शुरू कर दी। बस के मालिक का बेटा हर्ष तब तक घायल हो चुका था। एक गोली लगभग मेरे कान को चीरते हुए निकली और ड्राइवर को बस की स्पीड कम करनी पड़ी।'

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मुकेश ने बताया, 'जैसे ही बस की स्पीड कम हुई, एक आतंकी बस में चढ़ने ही वाला था कि हर्ष ने चिल्लाकर दरवाजा बंद करने को कहा। 'दरवाजा बंद करो-बंद करो दरवाजा' हर्ष चिल्ला रहा था।'

मुकेश ने कहा, 'मैं कुछ सोच नहीं पा रहा था लेकिन मुझे हर्ष की आवाज सुनाई दे रही थी। मैंने बस उसकी बात मानी। भगवान ही जानता है कि कैसे मुझे इतनी हिम्मत आई कि मैं दरवाजे के पास गया और मैंने उसे बंद कर दिया। मैं घबराया हुआ था और इस कारण दरवाजे तक पहुंचते हुए मैं फिसल भी गया था। लेकिन मैंने किसी तरह अपनी पूरी ताकत लगाकर दरवाजे पर पहुंच आए आतंकी को लात मारी और जोर से दरवाजा बंद कर दिया। सलीम बिना पीछे मुड़े बस चलाते रहे और इस तरह कई लोगों की जानें बच गईं।'

पटेल ने वह खौफनाक मंजर याद करते हुए कहा, 'मुझे याद नहीं है कि आतंकी कैसे दिखते थे क्योंकि ये सब बस दो मिनट के अंदर हुआ। मैं अब तक यह सोचकर कांप उठता हूं कि अगर मैंने दरवाजा बंद न किया होता तो क्या हो सकता था।'

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