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नरोदा पाटिया केसः जानिए कौन है बाबू बजरंगी और माया कोडनानी

गुजरात हाईकोर्ट ने 16 साल पुराने नरोदा पाटिया केस में बाबू बजरंगी की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है। जबकि माया कोडनानी समेत 17 लोगों को बरी कर दिया है।

नरोदा पाटिया केसः जानिए कौन है बाबू बजरंगी और माया कोडनानी

गुजरात हाईकोर्ट ने 16 साल पुराने नरोदा पाटिया हिंसक नरसंहार केस में बाबू बजरंगी की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है। जबकि माया कोडनानी समेत 17 लोगों को बरी कर दिया है। दरअसल, 28 फरवरी 2002 को नरोदा पाटिया में हुए नरसंहार में 97 लोगों की मोत हुई थी और 32 लोग घायल हो हुए थे।

कौन है बाबू बजरंगी-

बाबू भाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी गुजरात दंगों के दौरान विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के गुजरात विंग का नेता था। इसके बाद वह शिवसेना में शामिल हो गया। बाबू बजरंगी साल 2007 में फिर चर्चा में आया।

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एक मीडिया हाउस द्वारा लिए गए स्टिंग में बाबू ने खुद अपनी तारीफ करते हुए कहा कि किस तरह उसने गुजरात दंगों के समय हिंसा भड़काने में अहम भूमिका निभाई और साथ ही बम और बंदूकें भी मुहैया कराई थी।

साथ ही बाबू बजरंगी ने कहा कि उन्हें मारने के बाद मैं लौटा, फिर राज्य के गृहमंत्री को फोन किया और चैन की नींद सो गया। कहा कि मुझे ऐसा लगा कि मैने महाराणा प्रताप वाला काम किया है।

माया कोडनानीः डॉक्टर से राजनीति तक का सफर

पेशे से डॉक्टर माया कोडनानी का राजनितिक सफऱ बड़ा ही दिलचस्प है। नरोदा में माया का मेटर्निटी अस्पताल था और इसी काम के साथ-साथ वह राजनीति में भी आ गई। वे भाजपा की विंग आरएसएस से जुड़ गई।

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इसके बाद वह पहली बार गुजरात के नरोदा से भाजपा की विधायक चुनी गई। जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद उनके राजनीतिक सफर ने तब उंचाईयों को छूआ जब वह नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनाई गई। नरोदा पाटिया केस में नाम आने के बाद माया कोडनानी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

क्या है मामला

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी गई। इस घटना के अगले दिन नरोदा पाटिया इलाके में हिंसक नरसंहार हुआ। जिसमें 97 लोगों की मौत और 32 लोग घायल हुए।

इस केस की शुरुआत 2009 में हुई जिसमें पत्रकारों, पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए। जिसके बाद यह मामला स्पेशल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा और आज गुजरात हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

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