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कावेरी विवाद में देरी पर स्टालिन ने राज्यों की पार्टियों को मीटिंग के लिए बुलाया

कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के मुद्दे पर आज डीएमके प्रमुख ने राज्य की सभी पार्टियों के साथ उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया है। इस मीटिंग मे डीएमके अध्यक्ष एम.के स्टालिन भी मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी विवाद के संबंध मे कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के लिए छह सप्ताह का समय दिया था, जो कि 29 मार्च को खत्म हो गया है।

कावेरी विवाद में देरी पर स्टालिन ने राज्यों की पार्टियों को मीटिंग के लिए बुलाया

कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के मुद्दे पर आज डीएमके प्रमुख ने राज्य की सभी पार्टियों के साथ उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया है। इस मीटिंग मे डीएमके अध्यक्ष एम.के स्टालिन भी मौजूद रहे।

एम.के स्टालिन ने केंद्र पर साधा निशाना

द्रमुक नेता एम.के. स्टालिन ने शनिवार को कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन में देरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी नजरें कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर हैं। कैंद्र ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि कर्नाटक में आगामी चुनाव के मद्देनजर उसे अपने फैसले को लागू करने में तीन महीने का वक्त लगेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कैंद्र सरकार को कावेरी विवाद के संबंध मे कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के लिए छह सप्ताह का समय दिया था, जो कि 29 मार्च को खत्म हो गया है।

कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार का कहना था कि कैंद्र सरकार कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल नियंत्रण समिति का गठन छह हफ्तों के अंदर करें. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 16 फरवरी को सुनाया था.

क्या है कावेरी जल विवाद

गौरतलब हो कि कावेरी विवाद दो राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहा है। भारतीय संविधान के मुताबिक कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। कावेरी नदी मे जल के बँटवारे को लेकर इन दोनों राज्यों मे काफी सरमय से विवाद चल रहा है। कावेरी नदी मे कर्नाटक का 32 हजार किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल है। दोनों की राज्यों का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। इसी को लेकर दोनों मे दशकों से लड़ाई चल रही है।

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