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मोदी कैबिनेट के इन सूरमाओं ने किया GST का सपना साकार

जीएसटी लागू हो पाना इतना भी आसान नहीं था।

मोदी कैबिनेट के इन सूरमाओं ने किया GST का सपना साकार

कल शुक्रवार 30 जून की मध्यरात्रि में देश में सबसे बड़े कर सुधार के तहत जीएसटी यानि कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू हो गया। जीएसटी लागू होने पर जहां देश के हर कोने में उत्पाद पर एक सामान सेवा कर लगेगा तो वहीँ कई उत्पादों के दामों में भी उतार-चढ़ाव आ गया।

जीएसटी लागू होने के बाद जहां कुछ चीजों के दाम पहले से बढ़ गए तो वहीँ कुछ प्रॉडक्ट्स और सेवाओं के दाम घटने के कारण लोगों को कुछ राहत भी मिली है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीएसटी लागू हो पाना इतना भी आसान नहीं था। जीएसटी लागू हो पाने की राह में न केवल कई रोड़े सामने आए बल्कि विपक्ष के विरोध के साथ सरकार को उसके कुतर्कों का भी जवाब देना पड़ा।

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विपक्ष ने पूरी जोर आजमाइश कर दी थी कि सरकार इसे 1 जुलाई से न लागू कर सके लेकिन तमाम विरोधों का सामना करते हुए सरकार अंततः इसे लॉन्च करने में सफल रही।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीएसटी की लॉन्चिंग किसी एक इंसान के बस की बात नहीं थे ये पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कौन हैं मोदी सरकार के वो सूरमा जिनके बदौलत सरकार का जीएसटी को सपा हो सका साकार।

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अरुण जेटली

मोदी कैबिनेट के वित्त मंत्री अरुण जेटली पिछले तीन सालों में जीएसटी से सम्बंधित सभी कानूनी पेंचों को ठीक करने में लगे हुए हैं। जिसमें से एक संविधान संशोधन भी है। जेटली ने जीएसटी काउंसिल के पहले चेयरमैन के तौर पर सभी फैसलों पर राज्यों की आम सहमति बनाने की का काम किया। कभी कभी तो ऐसा भी हुआ कि इसके लिए जेटली का ने अहम फैसले अगली बैठक तक के लिए टाल दिए।

शक्तिकांत दास

मोदी सरकार के शासन में आने के बाद से ही पूर्व रेवेन्यू ऐंड इकॉनमिक अफेयर्स सेक्रटरी शक्तिकांत दास जीएसटी लागू करने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए वह जेटली और संसदीय कमिटी के साथ मिलकर इस काम में जुटे थे। दास ने राज्यों से बात करके सभी अडचनों को दूर किया और बिल का ड्राफ्ट तैयार किया।

नजीब शाह

नजीब शाह सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज ऐंड कस्टम्स (सीबीईसी) के चेयरमैन रह चुके है, जब सरकार ने जीएसटी की नींव डालने के बारे में भी विचार नहीं किया था तब उन्होंने ये प्लान पेश करते हुए एक सूत्रधार की तरह काम किया था। उन्होंने जीएसटी के वर्तमान स्वरूप को निर्धारित करने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

हसमुख अधिया

रेवेन्यू सेक्रटरी हसमुख अधिया ने जीएसटी को कामयाब बनाने के लिए सभी सरकारी एजेंसियों, कारोबारी और औद्योगिक संगठनों के संपर्क साधा। और उनके परेशानियां जान कर उन्हें दूर करने की कोशिस की।

वनजा सरना

सीबीईसी चेयरपर्सन की वनजा सरना ने अप्रैल से ही उस एजेंसी की अध्यक्षता की जिसे मोदी सरकार नेसौंपा जीएसटी को सफल बनाने का जिम्मा सौंपा था।

अरुण गोयल

जीएसटी काउंसिल के अडिशनल सेक्रटरी अरुण उत्तराखंड कैडर के आईएएस अफसर हैं। अरुण गोयल को जीएसटी से जुड़े नियम-कायदों का विशेषज्ञ माना जाता है।

उपेंद्र गुप्ता

सीबीईसी के कमिश्नर उपेंद्र गुप्ता पर जीएसटी के तकनीकी पक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जब कोई तकनीकी दिक्कत या परेशानी होती थी तो वो उसे सुलझा देते थे।

उदय सिंह उदय कुमावत

राजस्व विभाग के जॉइंट सेक्रटरी उदय सिंह अपनी टीम के साथ जीएसटी से संलंग्न कानून और नियमों पर मेहनत करते रहे।

नवीन कुमार

नवीन कुमार गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क के चेयरमैन रह चुके हैं और पूर्व में बिहार के चीफ सेक्रटरी भी रहे हैं। उन्हें वित्तीय मामलों की अच्छी समझ है। उन्होंने जीएसटी के तकनीकी प्लैटफॉर्म को विकसित करने का काम किया।

आलोक शुक्ला और अमिताभ कुमार

आलोक शुक्ला और अमिताभ कुमार दोनों ही सीबीईसी के टैक्स रिसर्च यूनिट के जॉइंट सेक्रटरी हैं। इन दोनों ने जीएसटी के टैक्स रेट और इनडायरेक्ट टैक्स पर काम किया और प्रॉडक्ट और सर्विस से संबंधित टैक्स स्लैब तैयार किया।

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