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मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने किया योग और सूर्य नमस्कार के पीछे छुपे इरादों से आगाह

हुकूमत का ना तो कोई मजहब होगा और ना ही उसकी कोई संस्था किसी मजहब की पैरवी करेगी और ना किसी से कराएगी।

मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने किया योग और सूर्य नमस्कार के पीछे छुपे इरादों से आगाह

लखनऊ. केन्द्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा योग और सूर्य नमस्कार को बढ़ावा देने के बीच आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने इनके नाम पर मुसलमानों की धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुंचाने की कथित कोशिशों से आम मुस्लिम समाज को आगाह किया और कहा है कि एक विशेष धर्म की मान्यताओं को औरों पर थोपने की कोशिश संविधान के खिलाफ है। देश में शरई कानूनों और मुसलमानों के अधिकारों के संरक्षण के लिये गठित शीर्ष संस्था आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी ने इदारे के सभी सदस्यों को गत 15 जून को लिखे खत में कहा है कि मुल्क में संविधान के खिलाफ काम करते हुए एक धर्म विशेष की मान्यताओं को बाकी मजहबों के मानने वालों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। इसके खिलाफ आंदोलन चलाने के लिये कमर कसी जाए। इसके लिए मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले होने वाली तकरीरों में भी इन साजिशों को चर्चा का विषय बनाया जाए।

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खत में कहा गया है कि बोर्ड मुल्क के तमाम शहरियों से कहना चाहता है कि हिन्दुस्तान के संविधान में तमाम शहरियों को अपने मजहब और अपनी तहजीब पर अमल करने की आजादी दी गयी है। साथ ही संविधान में यह भी कहा गया है कि भारत की हुकूमत धर्मनिरपेक्ष रहेगी। हुकूमत का ना तो कोई मजहब होगा और ना ही उसकी कोई संस्था किसी मजहब की पैरवी करेगी और ना किसी से कराएगी। मौलाना रहमानी ने खत में कहा कि सरकारी संसाधनों और अधिकारों को किसी खास मजहब या संस्कृति की तरक्की और उसे मजबूती देने के लिये इस्तेमाल करना संविधान के खिलाफ है।

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संविधान का तकाजा है कि सरकार के अधीन चलने वाले कालेज और स्कूल में सूर्य नमस्कार और योग न कराया जाए। उन्होंने पत्र में कहा 'असल मामला संविधान के तकाजों को पूरा करने और सरकारी संस्थानों में संविधान के खिलाफ कामों को रोकने का है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड हिन्दुस्तान के संविधान के मुताबिक काम करना चाहता है और असंवैधानिक कामों को रोकना चाहता है।

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