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चार राज्यों के राज्यपाल रहे अख्लाकुर रहमान किदवई का निधन

किदवई को 2011 में पद्मविभूषण अवार्ड मिला था

चार राज्यों के राज्यपाल रहे अख्लाकुर रहमान किदवई का निधन
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नई दिल्ली. पद्मविभूषण से सम्मानित और बिहार के पूर्व राज्यपाल डॉ. अख्लाकुर रहमान किदवई का दिल्ली में निधन हो गया। बता दें कि किदवई का निधन 96 वर्ष की उम्र में हुआ है। उन्होंने 17 सालों तक राज्यपाल का पदभार भी संभाला। किदवई बिहार ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल एवं हरियाणा के भी राज्यपाल रहे चुके थे।
यह थे अख्लाकुर रहमान किदवई
बता दें कि अख्लाकुर रहमान किदवई बाराबंकी के बड़ा गांव मसौली से थे और उनका जन्म 1 जुलाई 1920 में हुआ था। इनके पिता का नाम अशफिकुर रहमान किदवई और मां का नाम नसीमुन्निसा था। जानकारी के मुताबिक किदवई के परिवार को गांव में बड़ें सम्मानित रुप से देखा जाता रहा है। किदवई की शादी जमीला किदवई से हुई, इनके दो बेटे और चार बेटियां हैं। किदवई अपनी शिक्षा दिल्ली के जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी से करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिेए अमेरिका चले गए जहां इन्होंने एमएससी और पीएचडी की शिक्षा ली।
यहां से हई करियर की शुरुआत
द हिन्दू की खबर के मुताबिक, किदवई अपने करियर के शुरुआती दौर में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रहे। इनकी काबिलियत को देखते हुए ये बहुत ही जल्दी हेड ऑफ द डिपार्टमेंट बन गए। बाद में वह इसी अलीगढ़ यूनिवसिटी के 1983 में चांसलर भी बने और अपनी काबिलियत से एक बड़े मुकाम पर यूनिवर्सिटी को पहुंचाया।
इन राज्यों के रह चुके है राज्यपाल
अख्लाकुर रहमान किदवई ने 1974 में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन का पद संभाला। बता दें कि इन्हें 1979 में पहली बार बिहार के राज्यपाल का पद दिया गया। फिर 1993 में राष्ट्रपति ने इनको दोबारा बिहार का गवर्नर नियुक्त किया। किदवई को पंश्चिम बंगाल के राज्यपाल के लिए 1998 में चुना गया। जानकारी के मुताबिक इन्हें वर्ष 2000 में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। वहीं साल 2004 में किदवई को गवर्नर के तौर पर हरियाणा के लिए चुना गया। फिर 2007 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इनको राजस्थान का गवर्नर बना दिया।
2011 में पद्मविभूषण सम्मान
अख्लाकुर रहमान ने शौधकर्ता के तौर पर 40 किताबें साइंस और रिचर्स पर लिखी है। बता दें कि किदवई को 25 जनवरी 2011 में पद्मविभूषण सम्मान मिला। जानकारी के मुताबिक इन्होंने अपने गवर्नर काल में शिक्षा पर अधिक बल दिया। विशेषत: इन्होंने मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा। गौरतलब है कि केंद्र से वित्तिय मदद लेकर बिहार के वैशाली और नालंदा विश्वविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ाया ।
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