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सपा में रार बरकरार, अपनी-अपनी जिद पर अड़े मुलायम-अखिलेश

मुलायम की अखिलेश के साथ करीब 90 मिनट तक बैठक हुई।

सपा में रार बरकरार, अपनी-अपनी जिद पर अड़े मुलायम-अखिलेश
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी में जारी सियासी दंगल का पेंच सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। सपा कुनबे के इस घमासान में दृढ़ता से चुनाव आयोग में सपा और उसके चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ के दावे ठोकने के बावजूद सुलह के प्रयास जारी हैं। मंगलवार को पिता-पुत्र में अन्य नेताओं की मौजूदगी में लंबी बातचीत के बावजूद कोई बात नहीं बन सकी। ऐसे में चुनाव में सपा के इन दोनों गुटों का फैसला अब चुनाव आयोग पर भी टिका हुआ है।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पार्टी और चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर अपने-अपने हक के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग के दरबार में हैं, लेकिन वहीं मुलायम सिंह ने जिस प्रकार एक दिन पहले यहां दिल्ली में प्रेस कांफ्रें स के दौरान कठोरता दिखाते हुए कहा था कि सपा के विवाद को वे सुलझा लेंगे और मुख्यमंत्री के लिए अखिलेश ही सपा के उम्मीदवार होेंगे। सूत्रों के अनुसार अगले मुख्यमंत्री पद के लिये मुलायम द्वारा कल यूटर्न लिये जाने के बाद मंगलवार को उनकी अखिलेश के साथ करीब 90 मिनट तक बैठक हुई। अखिलेश अपने पिता के बुलावे पर उनके घर पहुंचे और लग रहा था कि इस महत्वपूर्ण बैठक में सपा के इस घमासान में सुलह-समझौता हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और सपा के दंगल के पेंच ज्यों के त्यों उलझे ही नजर आए।
एक-दूसरे अपनी शर्तो पर अड़िग
सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुलायम ने अखिलेश से पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर दावे के सिलसिले में चुनाव आयोग को दिये गये अपना प्रतिवेदन को वापस लेने और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने की शर्त रखी, मगर बात नहीं बन पायी। माना जा रहा है कि अखिलेश मुलायम की शर्तें मानने के लिये इसलिये तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें अपने पिता के करीबियों यानी पार्टी महासचिव अमर सिंह और मुलायम के भाई शिवपाल यादव पर कतई विश्वास नहीं है। अगर अखिलेश ने अध्यक्ष पद त्याग दिया तो मुलायम अध्यक्ष होने के नाते उनके फैसलों को पलट सकते हैं।
13 जनवरी को हो सकता है फैसला
सपा के इस प्रकरण से जुड़े एक घटनाक्रम में चुनाव आयोग ने मंगलवार को पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर सपा के दोनों गुटों द्वारा दायर दस्तावेजों पर सुनवाई की तारीख 13 जनवरी तय कर दी है। माना जा रहा है कि जिस गुट के पास 51 प्रतिशत विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों का समर्थन होगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा। सपा संस्थापक मुलायम ने कल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर अपना रूख बदलते हुए कहा था, कि अखिलेश ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। इससे इस विवाद के सुलझने की उम्मीदें जगी थी, लेकिन मामला उसी स्थिति में अटका रहा।
मुलायम-अखिलेश की दलीलें
सूत्रों के अनुसार मंगलवार को मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश से कहा कि तुम ही सीएम कैंडिडेट हो और कोई नहीं, लेकिन मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष मान लो। चुनाव आयोग से अपनी याचिका वापस लेने को भी कहा गया, जिसके बाद मामला हल करने का दावा किया। जबकि अखिलेश का दावा था कि उसे अधिवेशन में अध्यक्ष बनाया गया है और इस्तीफा देने के बाद ही हट सकता हूं, लेकिन अभी मामला चुनाव आयोग में है और याचिका मैने नहीं, बल्कि चाचा रामगोपाल ने ने दाखिल की है, जिसमें पौने पांच हजार लोगों के हलफनामे दिये गये है उन सबको वापस लेना पड़ेगा। अखिलेश ने पिता मुलायम को ही अपनी याचिका वापस लेने की बात भी कही है। इन सभी मुद्दो पर कोई टस से मस नहीं हुआ तो सुलह की पूरी कवायद के मंसूबों पर फिलहाल तो पानी ही फिर गया है।
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