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बाप-बेटे में ''साइकिल'' के लिए चुनाव आयोग में होगी जंग

अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया है।

बाप-बेटे में साइकिल के लिए चुनाव आयोग में होगी जंग
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी में अब चुनाव चिह्न पर 'कब्जे' की जंग शुरू होने वाली है। अखिलेश और मुलायम दोनों ही साइकिल पर अपनी दावेदारी को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग पहुंचेंगे। राष्ट्रीय अधिवेशन में लखनऊ में रविवार को अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। अब सपा के चुनाव चिह्न साइकिल पर दावे के लिए उनका खेमा आज चुनाव आयोग जा सकता है।
समाजवादी पार्टी की जंग अब चुनाव चिन्ह को लेकर होना वाली है कि आखिर कौन साइकिल पर अपना ठप्पा लगाएगा। साएम बेटा या पिता मुलायम। मुलायम और अखिलेश गुट दोनों ही साइकिल चुनाव चिह्न पर दावा जता रहे हैं। दोनों ही गुट साइकिल पर अपनी दावेदारी को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग पहुंचेंगे। मुलायम सिंह यादव सोमवार को दिल्ली में ही अमर सिंह से मुलाकात करेंगे और उनके साथ शिवपाल यादव भी होंगे। अमर सिंह लंदन से दिल्ली पहुंच रहे हैं।
साइकिल पर दंगल-
चुनाव आयोग जाने की तैयारी अकेले मुलायम खेमे में ही नहीं है, अखिलेश खेमा भी साइकिल पर दावेदारी के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा। मतलब साफ है कि झगड़ा इस कदर बढ़ चुका है कि सुलह के रास्ते बंद नजर आ रहे हैं। अब सवाल ये है कि समाजवादी पार्टी किसकी होकर रहेगी? मुलायम की या अखिलेश की? अखिलेश खेमा चुनाव आयोग में लखनऊ अधिवेशन में लिए गए फैसले के बारे में जानकरी दे सकता है।
मुलायम ने कहा राष्ट्रीय अधिवेशन अवैध-
उधर मुलायम सिंह यादव ने रविवार को इस अधिवेशन को ही असंवैधानिक करार दे दिया और उन्होंने रामगोपाल यादव को तीसरी बार सपा से छह साल के लिए निकालते हुए 5 जनवरी को आकस्मिक राष्ट्रीय अधिवेशन जनेश्वर मिश्र पार्क में बुलाया। अखिलेश यादव के सम्मेलन के कुछ देर बाद ही मुलायम ने कहा कि लखनऊ में आयोजित पार्टी का तथाकथित राष्ट्रीय अधिवेशन असंवैधानिक है। सपा संसदीय बोर्ड इस अधिवेशन में पारित प्रस्तावों और संपूर्ण कार्यवाही को असंवैधानिक घोषित करते हुए इसकी निंदा करता है।
नए गुट ने किया पार्टी कार्यालय पर कब्जा-
प्रदेश अध्यक्ष बदलते ही अखिलेश समर्थक नए गुट ने सपा के प्रदेश कार्यालय पर कब्जा कर लिया। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव व उनके समर्थक समझे जाने वाले पार्टी पदाधिकारियों के कक्षों के बाहर लगी नेम प्लेटें उखाड़कर फेंक दी गई और फोटो को पैरों तले कुचल दिया गया। अखिलेश समर्थकों ने इस दौरान जमकर शिवपाल विरोधी नारे लगाए और अखिलेश को फिर से प्रदेश की बागडोर सौंपने की हुंकार भरी।
गेंद चुनाव आयोग के पाले में-
चुनाव आयोग में एक निर्धारित प्रक्रिया है, आयोग ये देखेगा कि कार्यकारिणी के कितने सदस्य या विधायक, सांसद और पार्टी के कितने उम्मीदवार किसके साथ हैं। चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग ही फैसला लेगा और तब जाकर किसी एक की साइकिल पर देवादेरी साबित होगी। चुनाव आयोग ही ये तय करेगा कि असली समाजवादी पार्टी कौन है। इसमें समय लगेगा और चुनाव आयोग के निर्णय के खिलाफ अदालत जाने का विकल्प भी खुला रहेगा। वहीं खतरा ये भी है कि कहीं चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह 'साइकिल' को फ्रीज न कर दे।
क्या बरगद पर लड़ेंगे अखिलेश-
समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) अध्यक्ष कमल मुरारका ने अखिलेश यादव को उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की पेशकश दी है। मुरारका ने कहा कि वह अपनी पार्टी और चिन्ह दोनों अखिलेश को सौंपने को तैयार हैं। बता दें कि मुरारका का चुनाव चिन्ह बरगद का पेड़ है। इस तरह अखिलेश नई पार्टी और चुनाव चिन्ह के पचड़े से बच जाएंगे। बहरहाल चुनाव आयोग और अखिलेश क्या फैसला लेते हैं यह तो अब इस बात पर ही निर्भर करता है।
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