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वायु प्रदूषण पर अब बहस नहीं बल्कि निपटने के लिए कार्य-योजना की जरुरत

वायु प्रदूषण से पूरे देश के स्वास्थ्य पर और बचपन पर खराब असर पड़ रहा है।

वायु प्रदूषण पर अब बहस नहीं बल्कि निपटने के लिए कार्य-योजना की जरुरत
नई दिल्ली. खबरों के अनुसार, राज्यसभा में पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के बारे में कोई अलग से आंकड़े नहीं हैं जैसा कि ग्रीनपीस इंडिया की एक रिपोर्ट ‘एयरोकेलिप्स’ में बताया गया है। ग्रीनपीस ने प्रतिक्रिया में कहा है कि पर्यावरण मंत्रालय को वायु प्रदूषण की भयावहता पर बहस करने की बजाय इस समस्या से निपटने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाना चाहिए क्योंकि यह पहले ही प्रमाणित हो चुका है कि वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की मृत्यु हो रही है।
ग्रीनपीस कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं कि अब हमारे पास इस बात पर बहस करने का वक्त नहीं है कि वायु प्रदूषण से पूरे देश के स्वास्थ्य पर और बचपन पर खराब असर पड़ रहा है। आंकड़ों को नकारने और उसके स्रोत पर चर्चा करने की बजाय सरकारी एजेंसी को चाहिए कि वो एक स्पष्ट राष्ट्रीय कार्ययोजना लेकर आए। हमें खुशी है कि हमारी रिपोर्ट पर राज्यसभा में चर्चा हुई लेकिन हम चाहते हैं कि अब चर्चा कम हो और समस्या को निपटाने के लिए ठोस कदम उठाये जाएं।
सुनील ने आगे कहा कि वक्त की मांग है कि सरकार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक गंभीर और समावेशी योजना लेकर आए और उसे सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू करे। ऐसा करते हुए थर्मल पावर प्लांट में उत्सर्जन मानकों को कठोरता से नहीं लागू करने और वायु प्रदूषण से निपटने के लिये राष्ट्रीय नीति का नहीं होने के मुद्दे को भी शामिल करना चाहिए। साथ ही, हमारी तैयारी वायु प्रदूषण के जड़ में जाकर उससे निपटने की होनी चाहिए।
पीपुल हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सदस्य और स्वास्थ्य मंत्रालय की संचालन समिति की वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट (2015) के लेखक भार्गव कृष्णा ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गठित संचालन समिति के द्वारा यह पहले ही अच्छी तरह से प्रलेखित हो चुका है कि स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए जरुरी नीतिगत कदम उठाने चाहिए। इस वक्त यह महत्वपूर्ण है कि उन राष्ट्रीय मुद्दों की पहचान कर, उन्हें सुलझाना जिससे भारत को असल खतरा है।
ग्रीनपीस इंडिया ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण से होने वाली 12 लाख लोगों की मौत का आंकड़ा ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज द्वारा किये गए अध्ययन से लिया गया था। इसके अलावा, 2015 में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित संचालन समिति ने भी वायु प्रदूषण से होने वाले मौत और बीमारियों के बारे में बताया था। यह रिपोर्ट भी विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत में हुए अन्य अध्ययनों के आधार पर तैयार की गयी थी। पर्यावरण मंत्रालय ने भी केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी कई रिपोर्टों में यह माना है कि वायु प्रदूषण की वजह से मौतें हो रही हैं तथा कई तरह की बीमारी भी फैल रही है।
अंत में सुनील कहते हैं कि हमारे पास पहले से ही सारे सबूत हैं जो बताते हैं कि वायु प्रदूषण कितना खतरनाक साबित हो रहा है। अब वक्त है कि हम तत्काल राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाकर निश्चित समय-सीमा के भीतर वायु प्रदूषण से निपटे।
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