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आतंकी हमले से निपटने के लिए वायुसेना ने बढ़ाई एयरबेस की सुरक्षा

आतंकी हमले से निपटने को वायुसेना है पूरी तरह से तैयार।

आतंकी हमले से निपटने के लिए वायुसेना ने बढ़ाई एयरबेस की सुरक्षा
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देश की पश्चिमी-सीमा के बेहद करीब स्थित वायुसेना के महत्वपूर्ण एयरबेसों में से एक पठानकोट पर हुए आतंकी हमले की घटना को डेढ़ वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद अब इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलने लगे हैं कि वायुसेना ने इस हादसे से सबक लेते हुए देश के अन्य भागों में सीमा से लगे हुए अपने ठिकानों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने का काम युद्धस्तर पर करना शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में ऐसे किसी भी हमले से आसानी से निपटा जा सके।

यह जानकारी गुरुवार को वायुसेनादिवस (8 अक्टूबर) के पूर्व में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में वायुसेनाप्रमुख एयरचीफ मार्शल बी़ एस़ धनोआ ने हरिभूमि द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में दी।

संवेदनशील ठिकानों में गश्त बढ़ाई

वायुसेनाप्रमुख ने कहा कि मैं इस बात की घोषणा नहीं कर सकता हूं कि आतंकी हमला कहां पर होगा, कैसे होगा? लेकिन मैं यह जरूर कह सकता हूं कि पठानकोट एयरबेस पर बीते वर्ष हुए आतंकी हमले के बाद हमने सीमा से लगे हुए अपने अहम रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

इसमें सबसे पहले वायुसेना ने एयरबेसों के अंदर व आसपास उन जगहों की पहचान की है, जहां से आतंकी घुसपैठ हो सकती है। वहां पर गश्त की संख्या व समय में इजाफा किया गया है। इसके अलावा एयरबेसों की सुरक्षा के लिए तकनीक के आधार पर कई उपाय किए गए हैं।

फिदायीन हमले से मुकाबले को दी ट्रेनिंग

एयरबेस में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वायुसेना ने अपने कर्मियों को एक विशेष प्रशिक्षण दिया है। पहले जो ट्रेनिंग होती थी, उसमें गार्ड ड्यूटी के वक्त जवान केवल एक या दो घुसपैठियों का मुकाबला करने की ही काबिलियत रखते थे। लेकिन अब हमने इसे कई मायनों में फुलप्रूफ बना दिया है।

जिसकी मदद से वायुसैनिक न केवल घुसपैठियों से बल्कि फिदायीन हमले जैसी चुनौती के सामने आने पर भी उसका डटकर मुकाबला कर सकेंगे। इस विशेष ट्रेनिंग का वायुसेना ने भटिंड़ा और नलिया जैसे दो महत्वपूर्ण एयरबेसों पर हाल ही में प्रायोगिक आधार पर आकलन भी किया है। इस प्रक्रिया में अब तक कुल 6 हजार वायुसैन्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

एसओपी तैयार

बॉर्डर से निकटता रखने वाले एयरबेसों में पठानकोट के अलावा हलवारा, आदमपुर, जैसलमेर, जोधपुर, जामनगर, अंबाला, अमृतसर, श्रीनगर और चड़ीगढ़ मुख्य रूप से शामिल हैं। इनकी सुरक्षा के लिए बल ने एक एसओपी का खाका तैयार किया है।

इसमें वायुसेना ने अपने एयरबेसों में एक इंटीग्रेटेड पैरीमीटर सिक्योरिटी सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही निविदा प्रस्ताव (आरएफपी) आएंगे। जिसके बाद यह हमें मिलेगा। बल को कई निगरानी उपकरण भी मिले हैं।

इसमें पहली पंक्ति का सुरक्षा घेरा प्रदान करने के लिए यूएवी मुख्य रूप से शामिल हैं। उच्च-क्षमता के हथियारों की वायुसेना ने मांग की है, जिससे आतंकी के एयरबेस पर प्रवेश के पहले पायदान पर ही मार गिराया जाए।

हल्के बख्तरबंद वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिससे आतंकियों के घात लगाकर हमला करने की स्थिति में हमारे जवानों को सुरक्षा मिल सके व आतंकियों का सफाया करने में भी आसानी हो। साथ ही जवानों के लिए बुलेटप्रूफ हेलमेट, जैकेट और रात में निगरानी करने में दक्ष सैन्य उपकरणों को भी जमीनी स्तर पर मुहैया कराया जा रहा है।

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