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ओवैसी ने पूछाः समलैंगिकता और एडल्टरी अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

एआईएमआईएम के चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दिए एक साल हो गया है। क्या प्रधानमंत्री ने इस फैसले को नहीं पढ़ा है? क्या कानून मंत्री ने इस पढ़ा है? सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को कहीं भी असवैंधानिक नहीं कहा है। लेकिन आपने अपने अध्यादेश में कहा है।

ओवैसी ने पूछाः समलैंगिकता और एडल्टरी अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?
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एआईएमआईएम के चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दिए एक साल हो गया है। क्या प्रधानमंत्री ने इस फैसले को नहीं पढ़ा है? क्या कानून मंत्री ने इस पढ़ा है? सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को कहीं भी असवैंधानिक नहीं कहा है। लेकिन आपने अपने अध्यादेश में कहा है।

ओवैसी ने कहा, हम इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह हमारे शरियत के खिलाफ है। हमने इसका भी विरोध किया क्योंकि यह संविधान में निर्धारित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह अध्यादेश मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। यह उनके साथ अन्याय करेगा।
उन्होने कहा कि संविधान समानता का अधिकार प्रदान करता है। यदि इस अध्यादेश का इस्तेमाल एक मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ किया जाएगा तो उसे तीन साल की जेल की सजा होगी और यदि कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति करता है तो उसे एक साल की जेल की अवधि होगी। यह भेदभाव क्यों?
हैदराबाद सांसद ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा था, बल्कि इसे अलग रखा था। लेकिन कोर्ट ने धारा 377(समलैंगिकता) और 497(एडल्टरी) को असंवैधानिक कहा है। तो क्या अब मोदी सरकार इससे सबक लेते हुए अपने तीन तलाक के असंवैधानिक विधेयक को वापस लेगी?'
उनका कहना है कि इस्लाम में निकाह एक कॉन्ट्रैक्ट है, ऐसे में इसमें कोई आपराधिक प्रावधान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन तलाक का विधेयक महिलाओं के खिलाफ जाता है। उनका तर्क है कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक है, ऐसे में उन महिलाओं की देखभाल कौन करेगा, जिनके पति जेल में होंगे। उन्होंने इस विधेयक को संविधान की समानता के मूलभूत अधिकार के खिलाफ भी बताया है।
ओवैसी का कहना है कि सरकार को तीन तलाक को अपराध घोषित करने के बजाय उन लाखों महिलाओं की मदद के लिए कानून लाना चाहिए, जिनके पति उन्हें बिना तलाक दिए छोड़ चुके हैं।

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