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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला / बिचौलिए क्रिश्चयन मिशेल की गिरफ्तारी, मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी...?

यह निश्चित रूप से मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी है कि वह इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के साथ वीवीआईपी हेलिकाप्टर सौदे में हुए घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को प्रत्यार्पित कराकर भारत लाने में कामयाब हो गई है। जाहिर है, उससे भारतीय जांच एजेंसियों को बहुत से ऐसे तथ्य पता चलेंगे, जो अभी तक रहस्य बने रहे हैं।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला / बिचौलिए क्रिश्चयन मिशेल की गिरफ्तारी, मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी...?
यह निश्चित रूप से मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी है कि वह इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के साथ वीवीआईपी हेलिकाप्टर सौदे में हुए घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को प्रत्यार्पित कराकर भारत लाने में कामयाब हो गई है। जाहिर है, उससे भारतीय जांच एजेंसियों को बहुत से ऐसे तथ्य पता चलेंगे, जो अभी तक रहस्य बने रहे हैं।
यह बात तो सिद्ध हो चुकी है कि इस सौदे में बड़ी रकम रिश्वत के रूप में बांटी गई थी। रिश्वत लेने वालों में पूर्व वायु सेना प्रमुख त्यागी और उनके करीबी रिश्तेदार भी शामिल थे। जांच पड़ताल और पूछताछ में एक फैमिली का जिक्र भी आ चुका है। ये फैमिली कौन है, इसका खुलासा होना बाकी है।
लेकिन राजस्थान में चुनाव प्रचार कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह सोनिया गांधी पर निशाना साधा है, उससे साफ है कि भारतीय जनता पार्टी 2019 के आम चुनाव से पहले एक बार फिर इस मसले पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को घेरने की तैयारी कर चुका है।
पिछले कुछ महीने से राहुल गांधी और उनके प्रवक्ताओं की फौज ने जिस तरह राफेल सौदे को लेकर संशय के कृत्रिम बादल बनाने की चेष्टा की है, उसका सही जवाब देने का मजबूत सूत्र मिशेल के रूप में मोदी सरकार के हाथ लग गया है।
यदि मिशेल ने पूछताछ में गांधी परिवार की ओर इशारा कर दिया अथवा नाम ले दिया तो राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा होना तय है। कांग्रेस पहले ही गंभीर संकट से गुजर रही है। एक-एक कर वह पच्चीस चुनाव और अधिकांश राज्य हार चुकी है।
राफेल ही नहीं, कई दूसरे मसलों को भी कांग्रेस के नेतृत्व ने जिस तरह बिना किसी सबूत के बार-बार उछाला है, उससे यही लगता है कि 2019 के आम चुनाव से पहले वह मोदी की साफ-सुथरी छवि को मलिन कर कुछ राजनीतिक लाभ पाने की कोशिश में है परंतु लोगों पर इन आरोपों का कोई असर होता हुआ नहीं दिख रहा है।
मिशेल के प्रत्यर्पण से निश्चित तौर पर कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ सकती हैं क्योंकि इसके पुख्ता प्रमाण हैं कि 2005 और 2013 के बीच ब्रिटिश नागरिक और हथियारों के सौदागर क्रश्चियन मिशेल ने 180 बार भारत की यात्रा की है।
इसी बाच 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदा हुआ, जिसमें भारी भरकम रिश्वत दिए जाने की बात प्रमाणित हो चुकी है। इटली की एक अदालत इस मामले में दोषियों को सजा तक सुना चुकी है। भारत में भी तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी घेरे में आ चुके हैं।
हां, इसका पता लगना बाकी है कि किन किन राजनेताओं को रिश्वत की रकम पहुंचाई गई थी। सीबीआई मिशेल को अदालत में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर ले चुकी है। जहां प्रधानमंत्री इसे लेकर गांधी परिवार पर हमलावर दिखे, वहीं राहुल गांधी ने फिर पुराना राग अलापते हुए कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड की बात न करें, राफेल पर स्पष्टीकरण दे सरकार।
मिशेल को ऐसे समय भारत लाया गया है, जब पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया जारी है। छत्तीसगढ़ में मत पड़ चुके हैं। मध्य प्रदेश में भी एक दौर का मतदान हो चुका है। मिजोरम, तेलंगाना, राजस्थान में अभी बाकी है। ग्यारह दिसंबर को नतीजे भी आ जाएंगे। कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए सब कुछ दांव पर लगा रखा है।
2013 से लगातार चुनाव जीतती आ रही भाजपा का भी बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। पांच में से तीन राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसकी सरकारें हैं। इनमें से दो प्रदेशों में तो पंद्रह साल से भाजपा का राज है।
2019 के आम चुनाव से पहले वहां वापसी करने और नहीं कर पाने का नफा नुकसान उसे पता है।कांग्रेस के कई नेता भ्रष्टाचार के गंभीर मसलों में पहले ही फंसे हुए हैं। ऐसे में यदि अगस्ता रिश्वत मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर किसी तरह के छींटे लगते हैं तो पार्टी की आगे की राह कठिन से कठिनतर होती चली जाएगी।
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