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अग्नि-5 मिसाइल से जुड़ी ये 5 अहम बातें उड़ा देगी दुश्मनों के होश

भारत ने अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण आज उड़ीसा के उपतटीय क्षेत्र में किया।

अग्नि-5 मिसाइल से जुड़ी ये 5 अहम बातें उड़ा देगी दुश्मनों के होश
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भारत ने आज उड़ीसा अपटीय क्षेत्र में स्थित एक परीक्षण केंद्र से सतह से सतह पर मार करने वाली और परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम अग्नि-5 मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया। यह अग्नि श्रृंखला की सर्वाधिक आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल है जो 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक मार कर सकती है। इस परीक्षण के साथ भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमताओं तथा प्रतिरोधक शक्ति में और मजबूती आ गई है।

सफल रहा परीक्षण

रक्षा सूत्रों ने बताया कि सभी रडारों, ट्रैकिंग प्रणालियों और रेंज स्टेशनों ने मिसाइल के उड़ान प्रदर्शन पर नजर रखी। परीक्षण को ‘‘पूर्ण सफल' करार देते हुए सूत्रों ने कहा कि अत्याधुनिक मिसाइल ने 19 मिनट तक उड़ान भरी और 4,900 किलोमीटर की दूरी तय की।

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पहला यूजर एसोसिएट परीक्षण

उन्होंने बताया कि मिसाइल को सुबह नौ बजकर लगभग 54 मिनट पर अब्दुल कलाम द्वीप (जिसे व्हीलर द्वीप के रूप में भी जाना जाता है) स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र (आईटीआर) के लांच पैड-4 से एक मोबाइल प्लैटफार्म पर लगे एक कैनिस्टर लॉंचर से दागा गया। सूत्रों ने कहा, ‘‘चार सफल विकासात्मक परीक्षणों के बाद अग्नि-5 मिसाइल का यह पहला यूजर एसोसिएट परीक्षण है।'

अत्याधुनिक तकनीक से है लैस

अग्नि-5 मिसाइल अग्नि श्रृंखला की सर्वाधिक आधुनिक मिसाइल है जो नौवहन, दिशा-निर्देशन, आयुध और इंजन के लिहाज से नई प्रौद्योगिकियों से लैस है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अतिरिक्त नौवहन प्रणाली, अत्यधिक सटीकता वाली रिंग लेजर गाइरो आधारित जड़त्वीय नौवहन प्रणाली (आरआईएनएस) तथा सर्वाधिक आधुनिक और सटीक सूक्ष्म नौवहन प्रणाली (एमआईएनएस) ने सटीकता के कुछ मीटर के दायरे में मिसाइल का लक्षित बिन्दु पर पहुंचना सुनिश्चित किया।'

नौवहन प्रणाली से होती है निर्देशित

उन्होंने कहा कि मिसाइल को इस तरह से तैयार किया गया है कि अपने प्रक्षेपणपथ के उच्चतम बिन्दु पर पहुंचने के बाद धरती के गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से यह अपने लक्ष्य की तरफ यात्रा जारी रखने के लिए बढ़ी हुई गति के साथ धरती की तरफ लौटती है। अधिकारी ने कहा कि इसका प्रक्षेपण पथ अत्याधुनिक ऑनबोर्ड कंप्यूटर और जड़त्वीय नौवहन प्रणाली से निर्देशित होता है।

बहुत कम तैयारी के साथ दागा जा सकता है

अत्याधुनिक मोबाइल लॉंचर से जुड़े एक कैनिस्टर से हुआ तीसरा, चौथा और आज का परीक्षण ‘डेलिवरेबल कनफिगरेशन' थे जो किसी ‘ओपन कनफिगरेशन' की तुलना में इस क्षमता से योग्य बनाते हैं कि मिसाइल को बहुत कम तैयारी के साथ दागा जा सकता है। अत्यधिक विश्वसनीयता, रखरखाव पर ज्यादा व्यय न होने और अधिक सचलता जैसे इसके अन्य लाभ हैं।

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ये हैं अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें

भारत के पास अपने आयुध में अग्नि श्रृंखला की अग्नि-1 (700 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम), अग्नि-2 (दो हजार किलोमीटर), अग्नि-3 और अग्नि-4 (2500 किलोमीटर से लेकर 3500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता) वाली मिसाइलें हैं। अग्नि-5 का पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को किया गया था। इसका दूसरा परीक्षण 15 सितंबर 2013, तीसरा परीक्षण 31 जनवरी 2015 तथा चौथा परीक्षण 26 दिसंबर 2016 को किया गया था। ये सभी परीक्षण समान परीक्षण केंद्र से किए गए।

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