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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनिश्चितता की कगार पर गोवा में खनन गतिविधियां, चिंता में उद्योग और सरकार

उच्चतम न्यायालय का गोवा में लौह अयस्क खनन संबंधी गतिविधियां बंद करने का आदेश आज रात से प्रभावी होने के साथ ही प्रदेश का पांच दशक पुराना खनन उद्योग अनिश्चितता की कगार पर आ खड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनिश्चितता की कगार पर गोवा में खनन गतिविधियां, चिंता में उद्योग और सरकार

उच्चतम न्यायालय का गोवा में लौह अयस्क खनन संबंधी गतिविधियां बंद करने का आदेश आज रात से प्रभावी होने के साथ ही प्रदेश का पांच दशक पुराना खनन उद्योग अनिश्चितता की कगार पर आ खड़ा हुआ है। खदान और भूविज्ञान विभाग ने सभी चालू खदान लीज धारकों से नए अयस्कों का उत्खनन रोकने को कहा है। साथ ही अयस्क की ढुलाई भी रोक दी गई है। सभी संयंत्रों से खनन उपकरण हटा लिए गए हैं।

गोवा के कृषि मंत्री विजय सरदेसाई ने कल कहा था कि खनन प्रतिबंध प्रभावी होने के बाद राज्य को" सबसे बड़े" संकट का सामना करना पड़ेगा।

गोवा के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सुदीन धावलिकर ने आज कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 20 मार्च को गोवा आएंगे और उद्योग के साझेदारों से चर्चा कर इस संकट का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। खनन और पर्यटन क्षेत्र गोवा की आय के प्रमुख स्रोत हैं।

एक मंत्रिमंडल समिति ने कल राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से उद्योग और उसके हितधारकों को बचाने का आखिरी प्रयास करने के लिये शीर्ष न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करने का आग्रह किया है। फिलहाल पर्रिकर इलाज के लिए अमेरिका में हैं।
राज्य सरकार को चिंता है कि अचानक लौह अयस्क का खनन बंद होने से उनमें विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले करीब दो लाख लोगों का रोजगार छिन जाएगा।
इस बीच सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत खदान मालिक आज रात से अयस्क निकासी को रोक देंगे जबकि मशीनों को बाद में साइटों से निकाल लिया जाएगा। शीर्ष न्यायालय ने पिछले महीने गोवा में88 कंपनियों के लौह अयस्क खनन पट्टे रद्द कर दिए।
2015 में गोवा सरकार ने दूसरी बार इनका नवीनीकरण किया था। पीठ ने कहा कि पहले फैसले की व्यवस्था के विपरीत जिन कंपनियों के पट्टों का दूसरी बार नवीनीकरण किया गया है, वे15 मार्च तक खनन गतिविधियां जारी रख सकती हैं।
हालांकि उन्हें16 मार्च, 2018 से उस समय तक खनन कार्य बंद करने का निर्देश दिया जाता है और जब तक उन्हें खनन के लिए नया पट्टा( नयी नवीनीकरण नहीं) और पर्यावरण मंजूरी नहीं मिल जाती वे खनन नहीं करेंगी।
खदान मालिक और गोवा माइनिंग एसोसिएशन के सदस्य हरेश मेलवानी ने कहा, " उद्योग के रफ्तार नहीं पकड़ने का मुख्य कारण चीन जैसे बाजारों से मांग में कमी है, जो कि गोवा से निकलने वाले अयस्क का पारंपरिक खरीदार है। राज्य में उत्पादित अयस्क कम गुणवत्ता वाला है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कोई कीमत नहीं है।"
उन्होंने कहा कि प्रतिबंध हटा लिया जाता है तब भी उत्पाद पर कराधान जैसे कई कारणों के चलते उद्योग को संकट का सामना करना पड़ेगा। खनन उद्योग को बंद करने का गोवा पर आर्थिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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