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दवाओं के बाद अब हेल्थ सप्लीमेंट्स पर लगेगा बैन!

दवा कंपनियों का कहना है कि यह कदम फिक्स्ड डोज ड्रग कॉम्बिनेशन पर बैन जैसा है।

दवाओं के बाद अब हेल्थ सप्लीमेंट्स पर लगेगा बैन!

मुंबई. स्वास्थ्य मंत्रालय के देश के कुछ पॉप्युलर ऐंटी-बायोटिक्स और कफ सिरप पर बैन लगाने से परेशान दवा कंपनियों पर एक और आफत टूट सकती है। एक रेग्युलेटरी नोटिस के चलते 20,000 करोड़ रुपए की न्यूट्रास्युटिकल (हेल्थ सप्लिमेंट फूड) इंडस्ट्री पर खतरा मंडरा रहा है। इस सेगमेंट में सन फार्मा, ऐबॉट न्यूट्रिशन और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन जैसी दवा कंपनियां शामिल हैं।

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फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्डस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने कंपनियों को 2011 के बाद लॉन्च हेल्थ सप्लिमेंट की मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग के लिए सख्त गाइडलाइंस मानने का आदेश दिया है। सन, ऐबॉट और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के अलावा ऐमवे न्यूट्रिशन, मैनकाइंड फार्मा और हर्बलाइफ भारत में हेल्थ सप्लिमेंट्स का बड़े पैमाने पर प्रॉडक्शन करती हैं।
टॉप सेलिंग ड्रग्स की बिक्री रुकी
दवा कंपनियों का कहना है कि यह कदम फिक्स्ड डोज ड्रग कॉम्बिनेशन पर बैन जैसा है, जिसके चलते कोरेक्स, सेरेडॉन और डी कोल्ड जैसे टॉप सेलिंग ड्रग्स की बिक्री रुक गई थी। यह बैन हेल्थ मिनिस्ट्री ने लगाया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई है।

फैसले के मुताबिक नहीं
एक दवा कंपनी के एग्जिक्युटिव ने कहा कि एफएसएसएआई का नोटिफिकेशन शायद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक नहीं है। 'पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते अडवाइजरी बोर्ड को भंग किया गया था। अब हमें बताया जा रहा है कि इस कमिटी के पास जो प्रॉडक्ट्स अप्रूवल के लिए भेजे गए थे, उन्हें मंजूरी देने पर विचार किया जाएगा।'
फेसाई ने जारी किया नोटिफिकेशन
एफएसएसएआइ (फेसाईर्) के एन्फोर्समेंट डायरेक्टर राकेश चंद्र शर्मा की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया, 'यह फैसला लिया गया है कि जब तक न्यूट्रास्युटिकल फूड सप्लिमेंट्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स के स्टैंडर्डस नोटिफाइ नहीं किए जाते, तब तक ऐसे प्रॉडक्ट्स के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में जो बातें कही गई हैं, उनके आधार पर कार्रवाई हो सकती है।'
यह नोटिफिकेशन उन प्रॉडक्ट्स पर लागू नहीं होगा, जो 2011 में एफएसएसएआई ऐक्ट बनने से पहले से मिल रहे हैं या 19 अगस्त 2015 तक जिन प्रॉडक्ट्स का अप्रूवल पेंडिंग था। इसी तारीख को एफएसएसएआई की प्रॉडक्ट अप्रूवल अडवाइजरी कमिटी को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के चलते भंग किया गया था।
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