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संसद की स्थाई समिति ने दी रिपोर्ट, करोड़ों खर्च फिर भी यमुना रही मैली

राजधानी की प्यास बुझाने वाली यमुना नदी की सफाई के नाम पर सालों साल सरकारें करोड़ों रुपये खर्च करती हैं।

संसद की स्थाई समिति ने दी रिपोर्ट, करोड़ों खर्च फिर भी यमुना रही मैली
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नई दिल्ली. राजधानी की प्यास बुझाने वाली यमुना नदी की सफाई के नाम पर सालों साल सरकारें करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। लेकिन आज तक नदी की हालत में कोई सुधार नहीं आया है। सरकारी आंकड़ों की माने तो अब तक नदी की सफाई पर कुल 6500 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन यमुना है कि पहले के मुकाबले ज्यादा गंदी नजर आने लगी है। शहरी विकास पर गठित संसद की समिति की हालिया आई रिपोर्ट भी इस बात की तसदीक करती है कि नदी की गंदगी के पीछे दिल्ली के तीन नालों पर इंटरसेप्टर सीवर अब तक नहीं लगे हैं।
हरियाणा में यमुना नदी चार जिलों से होकर गुजरती है। युमनागर में ग्लूकोज फेक्ट्री, पेपर मिल और शूगर मिल का कचरा नदी में जाता है। लेकिन प्रदूषण बोर्ड के रीजनल अधिकारी पीके शर्मा का कहना है कि इस कचरे को साफ कर नदी में डाला जाता है। वहीं करनाल, पानीपत और सोनीपत से कईनाले नदी में गिरते हैं। प्रदेश के करीब 200 किलोमीटर हिस्से से यमुना नदी गुजरती है।
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