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पाक का ''हुक्का-पानी'' बंद करने में अफगान देगा भारत का साथ

भारत अफगानिस्तान की काबुल नदी पर बांध बनाने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

पाक का
नई दिल्ली. भारत की सर्जिकल स्ट्राइक से तिलमिलाए पाकिस्तान को जल्दी ही कूटनीतिक फ्रंट पर एक और झटका लग सकता है। खबरों के मुताबिक, भारत अफगानिस्तान की काबुल नदी पर बांध बनाने के विकल्प पर विचार कर रहा है। इससे काबुल नदी के पानी का इस्तेमाल स्थानीय सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिए किया जा सकेगा। इन इंफ्रा प्रॉजेक्ट के कारण काबुल का पानी अब सीधे पाकिस्तान नहीं जा पाएगा।

मामले से वाकिफ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों देश पूर्वी अफगानिस्तान की नदियों पर चेनाब जैसे नदी प्रॉजेक्ट के जरिये इसे मुमकिन बनाने का विकल्प तलाश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक भारत की खास दिलचस्पी काबुल नदी को लेकर है क्योंकि इसकी खूबियां जम्मू-कश्मीर की चेनाब नदी से मिलती है। दोनों नदियों का रिकॉर्डेड एवरेज फ्लो तकरीबन 2.3 एकड़ फुट का है। काबुल नदी का पानी बिना किसी अन्य इस्तेमाल के सीधे पाकिस्तान पहुंच जाता है। लेकिन इन खबरों के बाद पाकिस्तान के लिए चिंता की स्थिति पैदा हो गई है।

उधर उरी हमले के बाद भारत ने चेनाब नदी पर चलने वाले तीन प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। इससे पहले सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान की तरफ से आपत्ति जताए जाने के बाद इन प्रॉजेक्ट को रोक दिया गया था। हालांकि पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ इस तरह का कोई समझौता नहीं है। पूर्वी अफगानिस्तान की नदियों मुख्य तौर पर काबुल, कुन्नार और चित्रल के पाकिस्तान में गिरने का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य कुछ नियमों से जुड़ा है।

एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया,'नदियों पर इस तरह के प्रॉजेक्ट को तैयार करने में अफगानिस्तान की मदद कर भारत पाकिस्तान को सख्त संदेश दे सकेगा। अफगानिस्तान द्वारा इस मसले पर बार-बार अनुरोध किए जाने के कारण पाकिस्तान पहले से ही इस मोर्चे पर काफी चिंतित है।'

सूत्रों के मुताबिक, अफगानी राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी पिछले महीने जब भारत दौरे पर आए थे, तो उन्होंने खास तौर पर अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में नदी सिस्टम डिवेलप करने की संभावना का मुद्दा उठाया था। साथ ही, उन्होंने गंभीर आतंकी खतरों के बावजूद सलमा डैम प्रॉजेक्ट को पूरा करने के लिए भारत को बधाई भी दी थी। अधिकारियों ने बताया कि इस मसले पर दोनों पक्ष संपर्क में हैं। साथ ही, कई प्रॉजेक्ट पर चर्चा के लिए अधिकारी स्तर पर विचार-विमर्श भी चल रहा है।
अफगानी राष्ट्रपति दिसंबर के पहले हफ्ते में फिर से भारत दौरा करेंगे। वह अमृतसर में होने वाले हार्ट ऑफ एशिया मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करने यहां आएंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी मौजूद रहने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि अफगानिस्तान ने लंबे समय से यह बात कह रहा है कि सिंचाई की सही व्यवस्था होने से ननगरहर, पख्तिया और खोस्त जैसे उसके पूर्वी प्रातों की इकनॉमी पूरी तरह से बदल सकती है। ये इलाके फिलहाल आतंकी गतिविधियों के केंद्र हैं।
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