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व्यभिचार कानून में महिला भी पुरुष के बराबर दोषीः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को व्यभिचार कानून पर सुनवाई करते हुए कहा महिला को सजा न देना और सिर्फ पुरुष को सजा देना यह तर्क संगत नहीं है। पुरुष और महिला जो दूसरे की पत्नी है अगर सहमति से सेक्स करते हैं तो इसमें सजा सिर्फ पुरुष को ही क्यो?

व्यभिचार कानून में महिला भी पुरुष के बराबर दोषीः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को व्यभिचार कानून पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला को सजा न देना और सिर्फ पुरुष को सजा देना यह तर्क संगत नहीं है। जो दूसरे की पत्नी से सहमति से यौन संबंध बनाते हैं तो इसमें सजा सिर्फ पुरुष को ही क्यो?

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सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 497 के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समता के अधिकार में दोनों को बराबर का अधिकार है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह कहा कि अगर सेक्सुअल फ्रीडम को मौलिक अधिकार माना जाए तो यह अपराध सिर्फ पुरुष के लिए क्यों? इस कृत्य के लिए सिर्फ को अकेले सजा देना तर्कसंगत नहीं। आईपीसी की धारा 497 से भेदभाव हो रहा।

जजों की पीठ ने कहा कि हम इस सिर्फ इस बात की पड़ताल करेंगे कि क्या व्यभिचार को अपराध माना जाये या नहीं। इस मामले के याचिकाकर्ता जोसफ शाइन ने यह मामला कोर्ट में उठा कर आईपीसी की धारा 497 और सीपीआरपीसी की धारा 198 (2) को निरंस्त करने की मांग की है।

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