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पति के ''एक्सट्रा मैरिटल अफेयर'' पर कोई केस नहीं: SC

पति की बेवफाई पर पति के खिलाफ पत्नी के प्रति क्रूरता का केस नहीं बनता है।

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नई दिल्ली. शादी के बाद पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स यानी विवाहेतर संबंध के आधार पर एक व्यक्ति को उसकी पत्नी के प्रति क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले में सुनाया और आरोपी पति को बरी कर दिया।
कोर्ट के कहना है कि, शादी के बाद अवैध संबंधों के आधार पर पति के खिलाफ पत्नी के प्रति क्रूरता का केस नहीं बनता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'विवाहेतर संबंध अवैध या अनैतिक तो हो सकता है लेकिन इसे पत्नी के प्रति क्रूरता के लिए पति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि इसे आपराधिक मामला करार देने के लिए कुछ और परिस्थितियां भी जरूरी होती हैं।'
दीपक मिश्रा और अमिताभ रॉय की एक बेंच ने यह भी कहा कि पति या पत्नी की बेवफाई भी आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं है। इस मामले में महिला (दीपा) ने शादी के सात साल बाद आत्महत्या कर ली। वह अपने पति के कथित विवाहेतर संबंध को बर्दाश्त नहीं कर सकीं। इस मामले में महिला की मां और भाई ने भी खुदकुशी कर खुद को मार डाला।
कोर्ट ने कहा कि मानसिक क्रूरता की परिभाषा उन परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जिसका सामना एक व्यक्ति करता है। बेंच ने कहा, 'सिर्फ विवाहेतर संबंध आईपीसी की सेक्शन 498-ए (पत्नी के प्रति क्रूरता) के दायरे में नहीं आता है।
कोर्ट ने कहा, 'इस बात से कोई इनकार नहीं कि क्रूरता सिर्फ शारीरिक ही नहीं होती है बल्कि यह मेंटल टार्चर या असामान्य व्यवहार के रूप में भी हो सकती है। यह कथित केस के तथ्यों पर निर्भर करेगा।' बेंच ने कहा, 'सिर्फ इसलिए इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जाएगा कि पति विवाहेतर संबंध में संलिप्त है और पत्नी को शक है।'
कोर्ट ने कहा कि महिला तलाक ले सकती है या कोई और उपाय कर सकती है। बेंच ने कहा, 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि अगर एक पति विवाहेतर संबंध में है, तो यह निश्चित रूप से तलाक का आधार तो हो सकता है लेकिन आईपीसी के सेक्शन 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।'
ट्रायल कोर्ट ने उस व्यक्ति को आईपीसी के सेक्शन 498 ए और डाउरी ऐक्ट (दहेज) के तहत दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने दो साल की सजा भी सुनाई थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी उसे आत्महत्या का दोषी ठहराया और चार साल कैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जो महिला के पिता को भुगतान किया जाना था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को खारिज कर दिया।
बेंच ने कहा, 'यह उल्लेख करना जरूरी है कि दीपा पति के अवैध संबंध को पचा नहीं सकी और आत्महत्या कर ली। दीपा की मां और भाई ने भी ऐसा ही किया। इस तरह की स्थिति में यह कहना मुश्किल होगा कि अभियोजन पक्ष ने सेक्शन 498 ए के तहत आरोप और यह चीज साबित कर दी कि कथित क्रूरता के कारण पत्नी ने आत्महत्या की।'
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