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पीएनबी घोटाले के बावजूद 2019-20 में सुधरेंगे बैंकों के हालत: S & P रिपोर्ट

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने के लिए और पुख्ता कदम उठाने का सुझाव देते हुए एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधर सकती है।

पीएनबी घोटाले के बावजूद 2019-20 में सुधरेंगे बैंकों के हालत: S & P रिपोर्ट
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने के लिए और पुख्ता कदम उठाने का सुझाव देते हुए एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधर सकती है।

एसएंडपी की रिपोर्ट ‘क्या वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार से उभरते बाजारों के बैंकों की स्थिति सुधरेगी’ में कहा गया है कि पंजाब नेशनल बैंक के हालिया 13,000 करोड़ रुपए के घोटाले से भारतीय बैंकिंग प्रणाली में संचालन और पारदर्शिता को लेकर अंतर्निहित कमजोरियां का पता चलता है, विशेषरूप से सरकारी बैंकों में।

सुधार के पुख्ता कदम की जरुरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद को अलग- अलग कर कदम उठाए हैं, लेकिन बैंकों में सुधार के लिए और पुख्ता कदमों की जरूरत है। साथ ही उनकी आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।

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पुनर्पूंजीकरण से मिलेगी मदद

एसएंडपी के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रस्तावित पुनर्पूंजीकरण से डूबे कर्ज से हुए नुकसान से उबरने में उन्हें मदद मिलेगी और साथ ही नियामकीय पूंजी जरूरत को भी पूरा कर पाएंगे। ‘हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार होगा।’

ऋण पहचान की प्रक्रिया होगी तेज

अमेरिकी एजेंसी का मानना है कि भारत के सरकारी बैंकों का कमजोर अथवा जोखिम वाला ऋण 13 से15 प्रतिशत है। हालांकि, सितंबर, 2017 तक इन बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 10.2 प्रतिशत थीं। एसएंडपी ने कहा कि अगली कुछ तिमाहियों में बैंक कमजोर ऋण की पहचान की प्रक्रिया तेज करेंगे।

पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक 4-5 अप्रैल को

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगले वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक 4 और 5 अप्रैल को होगी। खुदरा मुद्रास्फीति दर में गिरावट के मद्देनजर इस बैठक में एमपीसी नीतिगत दरों में बदलाव पर फैसला ले सकती है।

रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। पिछली तीन द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठकों में केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को छह प्रतिशत पर कायम रखा है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को 2018-19 के लिए मौद्रिक समीक्षा बैठकों का कैलेंडर जारी किया।

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पहली बैठक के नजीजे 5 अप्रैल को घोषित

वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक 4 और 5 अप्रैल को होगी। वहीं अंतिम बैठक 5 और 6 फरवरी को होगी। पहली बैठक के नतीजे 5 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे। उद्योग चाहता है कि औद्योगिक उत्पादन को रफ्तार देने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करे।

समिति की अगुवाई गवर्नर करेंगे

रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली एमपीसी के अन्य सदस्यों में डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य, कार्यकारी निदेशक देवव्रत पात्रा शामिल हैं। समिति के बाहरी सदस्यों में चेतन घाटे, पमी दुआ और रविंद्र ढोलकिया शामिल हैं।

(भाषा- इनपुट)

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