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दुर्घटनाओं की राजधानी बन गया है भारत: सुप्रीम कोर्ट

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि मानव जीवन कीमती है।

दुर्घटनाओं की राजधानी बन गया है भारत: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली. भारत में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर केंद्र सरकार को फटकार लगते हुए प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि मानव जीवन कीमती है। भारत में सड़कों के जाल का विस्तार होने के चलते, सड़क अवसंरचना के आर्थिक विकास का अभिन्न अंग होने के चलते, दुर्घटनाएं आम नागरिक के जीवन पर गहरा असर डालती हैं। आर्थिक विकास के रास्ते पर चल रहा देश होने के नाते, विश्व में भारत 'दुर्घटना की राजधानी' होने के तमगे से बच सकता है।
सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं भारत में
आपको बता दें, वर्ष 2014 में ही भारत में राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों पर कुल 2.37 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कम से कम 85,462 लोग मारे गए और 2.59 लाख लोग घायल हो गए। वहीं साल 2009 के आंकड़ों के अनुसार, विश्व भर में हुई सड़क दुर्घटनाओं में से सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं भारत में हुईं। इससे हर चार मिनट में एक सड़क दुर्घटना होने के संकेत मिले। सड़क दुर्घटनाओं को ध्यम ने रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को अपने एक फैसले में कहा था कि सभी हाइवे पर शराब कि बिक्री पर रोक लगा दी जाये। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा दुकानों के लाइसेंस का अगले साल 31 मार्च के बाद नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
दुनिया की दुर्घटना राजधानी
पिछले कई साल में वाहन दुर्घटनाआें में हुई मौतों के आंकड़ों पर गौर करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि भारत ‘‘दुनिया की दुर्घटना राजधानी’’ होने के तमगे से बच सकता है। इसके साथ ही न्यायालय ने शराब पीकर वाहन चलाने से रोकने के नियम के ‘‘पर्याप्त क्रियान्वयन’’ की जरूरत पर जोर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि आर्थिक विकास के शीर्ष पर चल रहे भारत जैसे देश के लिए जरूरी है कि वह सड़क दुर्घटनाओं में, खासकर नशे में वाहन चालन के कारण, लोगों की कीमती जिंदगियों को बर्बाद होने से रोकने के लिए कानून का समुचित तरीके से क्रियान्वयन करे।
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