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हर कार्य के लिए ''आधार कार्ड'' अनिवार्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि आधार योजना को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर निर्णायक फैसला देने के लिए सात न्यायाधीशों वाली पीठ के गठन की आवश्यकता होगी।

हर कार्य के लिए
नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने आज स्पष्ट किया कि सरकार और उसकी एजेंसियां सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं कर सकती हैं।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर, न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ ने हालांकि यह भी कहा कि सरकार और उसकी एजेंसियों को गैर-कल्याणकारी कार्यों, जैसे कि बैंक खाता खुलवाने में आधार कार्ड मांगने से मना नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन सहित अन्य आधार पर आधार योजना को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर निर्णायक फैसला देने के लिए सात न्यायाधीशों वाली पीठ के गठन की आवश्यकता होगी।
हालांकि, न्यायालय ने सात न्यायाधीशों वाले पीठ के गठन पर असमर्थतता जताते हुए कहा कि इस पर फैसला बाद में होगा। याचिका दायर करने वालों मे से एक की ओेर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का सम्मान नहीं कर रही है कि आधार कार्ड का प्रयोग स्वैच्छिक होगा अनिवार्य नहीं।
उच्चतम न्यायालय ने 11 अगस्त, 2015 को कहा था कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा और अधिकारियों को योजना के तहत एकत्र किए गए बायोमिट्रिक आंकडे साझा करने से मना किया था।
हालांकि, 15 अक्तूबर, 2015 को उसने पुराने प्रतिबंध को वापस ले लिया और मनरेगा, सभी पेंशन योजनाओं भविष्य निधि, और राजग सरकार की महत्वकांक्षी ‘‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना'' सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आधार कार्ड के स्वैच्छिक प्रयोग की अनुमति दे दी।
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