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वर्ष 2016: इस साल देश ने खोए सबसे ज्यादा जवान

87 में से 71 जवान सिर्फ कश्मीर घाटी में शहीद हुए हैं।

वर्ष 2016: इस साल देश ने खोए सबसे ज्यादा जवान
नई दिल्ली. साल 2016 में जहां एक ओर देश में कई आतंकी हमले हुए। भारतीय सेना ने भी आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। देश के लिए लड़ते-लड़ते कई जवानों ने अपना दम तोड़ दिया लिया देश का तिरंगा नीचे नहीं होने दिया। कुल मिलाकर देखा जाए तो वर्ष 2016 जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में देश ने कई जवानों को खो दिया। आइए विस्तार से जानते हैं -
बीते शनिवार को जम्मू और कश्मीर के पंपोर में सेना के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 3 जवान शहीद हुए। 87 में से 71 जवान सिर्फ कश्मीर घाटी में शहीद हुए हैं। शहीदों में 6 अफसर भी शामिल हैं। 2008 के बाद किसी एक साल में सुरक्षा बलों की शहादत का ये सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। सितंबर में उरी अटैक में (आर्मी कैंप पर आतंकी हमले में ) 18 जवान शहीद हुए थे।
उरी हमला 18 सितम्बर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर हुआ, एक आतंकी हमला है जिसमें 18 जवान शहीद हो गए। सैन्य बलों की कार्रवाई में सभी चार आतंकी मारे गए।
बात दें कि इस हमले के बाद भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी। सेना ने पीओके में घुसकर कई आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद किया था, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से सुरक्षा बलों पर आतंकी हमलों की वारदातों में भी इजाफा हुआ है। 28 अक्टूबर को हुए सर्जिक स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तानी रेंजर्स लगातार सीज फायर का उल्लंघन कर भारतीय चौकियों पर गोलीबारी कर रहे थे।
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में शनिवार के दिन श्रीनगर-जम्मू हाईवे से गुजर रहे सेना के काफिले पर मोटरसाइकिल सवार 2 आतंकियों ने हमला किया था। हमले के बाद आतंकी फरार हो गए थे। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी के दौरान राजमार्ग पर काफी लोग होने के कारण सेना जवाबी कार्यवाही नहीं कर सकी। इस मौके का फायदा उठाकर आतंकी भागने में सफल हो गए। सुरक्षा बल इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
टेररवाच डेटा साइट SATP के मुताबिक 2016 में जम्मू और कश्मीर में पिछले हफ्ते तक कुल 84 जवान शहीद हुए थे। 2008 में 90 जवान शहीद हुए थे। मुंबई हमले की वजह से उस साल भी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था। 2009 में सूबे में 78 जवान आतंकी हमलों में शहीद हुए थे, 2010 में 67 और 2011 में 30 जवान शहीद हुए थे। 2012 में सूबे में सुरक्षा बलों को कम नुकसान झेलना पड़ा था। उस साल आतंकी हमलों में 17 जवान शहीद हुए थे। 2013 में ये आकड़ा 61 था तो 2014 में 51 और 2015 में 41 रहा।
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