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स्वतंत्रता दिवस 2018 : भारत को कैसे मिली अंग्रेजों से आजादी, जानें इससे जुड़ी 8 खास बातें

15 अगस्त 2018 को भारत अपनी आजदी का 72वां साल मनाएगा। आज हम जिस स्वतंत्र भारत में जी रहे हैं। अपने फैलसे लेने और अपने हितों के लिए आवाज उठाने की आजादी मिली हुई है।

स्वतंत्रता दिवस 2018 : भारत को कैसे मिली अंग्रेजों से आजादी, जानें इससे जुड़ी 8 खास बातें

15 अगस्त 2018 को भारत अपनी आजदी का 72वां साल मनाएगा। आज हम जिस स्वतंत्र भारत में जी रहे हैं। अपने फैलसे लेने और अपने हितों के लिए आवाज उठाने की आजादी मिली हुई है। शायद आपको पता हो कि भारत को करीब 200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी की दांस्ता झेलनी पड़ी थी। तब आजादी पाने के लिए लाखों लोगों ने शहादतें दी थी। जिसके बाद हमें 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी।

दरअसल भारत को हमेशा से ही वीर बलिदानियों की भूमि कहा जाता है। अपनी मातृ भूमि के लिए अपना सर्वस्व लुटाने में कभी भी भारत के वीर पुत्रों ने संकोच नहीं किया। 17वीं सदी में भारत के अंदर व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे 18वीं सदी तक धोखे से पूरे भारत पर कब्जा जमा लिया था। हम आपको स्वतंत्रता से पहले जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं...

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वीरों ने दी कुर्बानियां

भारत को आजादी दिलाने की कोशिस करने में लाखों लोगों ने हंसते-हंसते मौत को अपने गले लगा लिया था। जिसमें कुछ प्रमुख नाम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, मंगल पाण्डें, बाल गंगाधर तिलक के अलावा रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी कुर्बानियां दी थीं।

गांधी जी का आंदोलन

राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने देश को अहिंसा के मार्ग पर चलकर आजादी दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। जिसमें उन्हें खेडा सत्याग्रह आंदोलन,संविनय अवज्ञा आंदोलन,भारत छोडो आंदोलन,दांडी मार्च के अलावा खिलाफत सरीखे आंदोलन किए थे।

अंगेजों का साम्राज्य

ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में आकर पहली नवाब सिराजुद्दोला से 1757 में युद्ध किया। लेकिन इस युद्ध में भारत के नवाब को हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में अपना कब्जा कर लिया था।

आजादी की पहली क्रांति

एसा माना जाता है कि भारत ने पहली बार 1857 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांति की लहर आई, जिसमें मंगल पाण्डे ने इस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध आवाज उठाई थी। जिसके बाद देश में बगावती सुर तेज हुए थे हालांकि तब ब्रिटिश सरकार ने मंगल पांडे को फांसी की सजा दे दी और वह आजादी की लड़ाई लड़ते लड़ते शहीद हो गए।

क्रांग्रेस का उदय

ब्रिटिस सरकार को भारत से खत्म करने के लिए नई- नई योजनाएं बनाई गई, आंदोलन किए गए और लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया गया तब 1867 में दादा भाई नौरोजी ने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और सुरेंद्र नाथ बनर्जी ने इंडियन नेशनल एसोसिएशन की स्थापना 1876 में की.इसी बीच सन 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना की गई जिसमें कई दिग्गज नेता शामिल हुए और महात्मा गांधी के नेतृत्व में कई आंदोलन किए गए जिससे ब्रिटिस हुकुमत डगमगाने लगी। अंग्रेजो की हुकूमत डगमगाने लगी।

आजादी के दीवाने

आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए हर जाति-धर्म के लोगों ने अपना पूरा योगदान दिया। जिसमें महात्मा गांधी के अलावा बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, श्री अरविंदो घोष, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह आदि का आजादी में महत्वपूर्ण योदगान दिया।

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अहिंसा का विरोध

दरअसल महात्मा गांधी अहिंसा के मार्ग पर चलकर आजादी चाहते थे लेकिन कुछ लोगों का मानना था कि आजादी किसी भी कीमत पर मिले मंजूर है। जिसके चलते भगत सिंह, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने अपना अलग रास्ता अपना लिया।

करो या मरो

9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की वे इसे अहिंसा के मार्ग पर चलकर पूरा करना चाहते थे लेकिन इस बीच लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला जिसके चलते कई जगह हिंसा भी हुईं. इसी दौरान गांधी जी ने करो या मरो का नारा भी दिया

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