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मशहूर मुस्लिम नेता ने बताया, कौन-कौन से देश रातोदिन भारत की छवि खराब करने में लगे हैं

मौलाना ने कहा कि मैं एक मुस्लिम परिवार से संबंध रखता हूं और इस मामले को मैंने गहराई से समझा व अध्ययन किया है।

मशहूर मुस्लिम नेता ने बताया, कौन-कौन से देश रातोदिन भारत की छवि खराब करने में लगे हैं

बीते 21 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय (सुको)की ओर से अयोध्या-रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद को दोनों समाजों से बातचीत कर हल निकालने के सुझाव पर देश के धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने काम करना शुरू दिया है। इसके तहत एक तदर्थ समिति का गठन किया गया है, जो आने वाले समय में इस मामले पर सभी राज्यों में हिंदू-मुसलमान समेत समाज के अन्य वर्गों के बीच जाकर उनकी राय लेगी और अंत में उसका एक व्यापक प्रारूप सुको में समक्ष निर्णय के संबंध में पेश करेगी। ‘अयोध्या वार्ता कमेटी’ नामक इस समिति में कुल 21 लोग हैं। इसमें से संवाद प्रक्रिया में शामिल एक अहम सूत्रधार व जमात उलमा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोलाना सुहेब कासमी से हरिभूमि ने खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

इस समिति के गठन का उद्देश्य क्या है?

इसका गठन देश के धार्मिक रूप से विवादित मामलों का हल निकालने के लिए किया गया है। इसमें कुल 21 सदस्य हैं, जिनका संबंध किसी राजनीतिक संगठन से नहीं है। बल्कि वो पूरी तरह से सामाजिक व धार्मिक संगठनों से संबंध रखते हैं। अभी समिति के केंद्र में दशकों से अटके पड़े हुए अयोध्या-रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद का मुद्दा है। इसने हिंदू-मुसलमान दोनों समुदायों के बीच नफरत व खाई बढ़ाने का काम किया है। इस दूरी को खत्म करना व बातचीत से मामले का हल निकालना ही हमारा लक्ष्य है। सुको के संज्ञान के बाद यह कवायद शुरू की जा सकी है। इसके लिए हम न्यायालय के शुक्रगुजार हैं। मुझे उम्मीद है कि जिस तरह से इस देश के लोगों खासकर मुस्लिम समाज ने तीन तलाक को लेकर आवाज उठायी है। ठीक उसी तरह से इस मामले का भी जल्द ही हल निकलेगा।

किस तरह से अपनी बात को समाज के सामने रखेंगे?

अब तक हमारी टीम ने देश के कुल 25 राज्यों का दौरा कर कुल दो लाख लोगों की इस मामले को लेकर नब्ज टटोली है। इसमें शामिल महिलाओं, बच्चों, युवाओं व उम्रदराज लोगों में से 97 फीसदी का कहना है कि वो इस विवाद का हल बातचीत के जरिए निकालने के पक्ष में हैं। हाल ही में हमने दिल्ली के निजामुद्दीन में इस पर एक अहम बैठक की थी। जिसमें देवबंद, बरेलवी, लखनऊ, मद्रास, बॉम्बे, कोलकात्ता, बैंगलुरु, केरल, असम, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु से आए लोगों ने भाग लिया। इसमें यह तय हुआ कि इस मामले को अब जनता के समक्ष संवाद के लिए ले जाया जाएगा और इसका हल निकालने की कोशिश की जाएगी। इस कड़ी में पहली जनसंवाद बैठक अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भोपाल में होगी। इसमें हैदराबाद, श्रीनगर, लखनऊ, बॉम्बे, मद्रास के उलेमा और विद्वान शामिल होंगे और अपनी राय देंगे।

विवाद से दुनिया के सामने देश की छवि कैसे खराब हो रही है?

मेरा अनुभव यह कहता है कि अयोध्या-बाबरी विवाद ऐसा मुद्दा है, जो दशकों से देश की छवि को वैश्विक स्तर पर लगातार धूमिल कर रहा है। इतना ही नहीं यह विकास के मामले में भी हमारे पिछड़ने का एक बड़ा कारण रहा है। आज दुनिया के 56 प्रमुख मुस्लिम देश इस विवाद को हर साल नए तरीके से अपने यहां प्रस्तुत कर भारत की छवि खराब करते हैं। इसमें हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी शामिल है। पाक के अलावा अरब देश भी इसमें पीछे नहीं हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को अपने फायदे के लिए बराबर अपने समाजों के सामने उछालकर फायदा उठाया है।

क्या आप आरएसएस से प्रभावित होकर तो काम नहीं कर रहे हैं?

मैं एक पढ़ा-लिखा, विकास व तरक्की पसंद खुले विचारों वाला मुसलमान हूं। मैं इस देश के उस हर नागरिक व संगठन के साथ हूं, जो राष्टÑहित के लिए काम करता है। आप उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आईने से जोड़कर देख रही हैं। मैं उसे देशहित, सामाजिक शांति, विकास व समृद्धि के साथ जोड़कर देखना पसंद करता हूं। इस मामले पर संघ का आनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्टÑीय मंच भी संवाद का पक्षधर है। हम उसके विचारों का समर्थन करते हैं व बातचीत में उनकी जुझारू पहल को स्वीकार करते हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों से आपको इतनी शिकायत क्यों है?

पहले की सरकारों में इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी गई। मैं पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल की बात करता हूं। मस्जिद इन दोनों के इंतकाल के कई वर्षों बाद ढहाई गई थी। लेकिन इन्होंने अपने शासन के समय इस मामले पर केवल मुसलमानों को डराकर ही नहीं बल्कि सूबे में रहने वाले दलितों व पिछड़ों को डराकर भी वोट हासिल किए थे। यह वोट के लिए उनका इस्तेमाल करने जैसा था।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से आपको क्या समस्या है?

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जो देश में मुसलमानों का ठेकेदार बनता है। वो इस मुद्दे को कभी भी हल होते हुए नहीं देख सकता है। क्योंकि इसकी बुनियाद पर ही उनकी रोटियां व तरक्की टिकी हुई है। इन्होंने आज तक इस मामले को उलझाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकी हैं। इसका नुकसान समाज ने उठाया है।

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