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उड़ीसा के 54 कॉलेजों में नहीं है कोई छात्र, लेकिन पिछले दो साल से चल रहा है सफलतापूर्वक

ओडिशा में 54 कॉलेजों में पिछले दो शैक्षणिक सत्र बिना छात्रों के चल रहे थे

उड़ीसा के 54 कॉलेजों में नहीं है कोई छात्र, लेकिन पिछले दो साल से चल रहा है सफलतापूर्वक
भुवनेश्वर. उच्च शिक्षा का स्तर ऊपर की जगह नीचे गिरता जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में जहां दाखिले के लिए लाखों छात्र आवेदन करते है तो वही ओडिशा में 54 कॉलेजों में पिछले दो शैक्षणिक सत्र बिना छात्रों के चल रहे थे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार 2012-13 में कालाहांडी जिले के वेदांता देव लांजीगढ साइंस कालेज और एक डिग्री कालेज में भी किसी छात्र ने दाखिले के लिए आवेदन नही किया । इस के साथ सत्र 2013-14 के दौरान बारहवीं कक्षा के 35 जूनियर कॉलेजों में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया। इसके अलावा 2012-13 में करीब 18 अन्य जूनियर प्लस टू कॉलेजों में छात्र ने रूचि नहीं दिखाई।
सभी कॉलेजों में सबसे अधिक संख्या (12) खुर्दा जिले में रही है, जिसमें एक भी छात्र ने प्रवेश के लिए दाखिले नहीं लिया। इसके बाद सुन्दरगढ़ जिले में 4 कॉलेजों, बालासोर और मयूरभंज में तीन कॉलेजों, संभलपुर कटक, गंजम और जेजपुर में दो कॉलेजों और भद्रक नयागढ, जगदीशपुर केन्द्रपाडा और गजापति में एक-एक कॉलेजों हैं जो सत्र 2012-13 और 2013-14 में छात्रों के दाखिले की राह तकते रहे । उल्लेखनीय है कि 2012-13 में भी खुर्दा जिले में 18 कॉलेजों में प्रवेश शून्य रहा था।
संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो भारत की उच्चतर शिक्षा व्यवस्था अमरीका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आती है लेकिन जहाँ तक गुणवत्ता की बात है दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है। उड़ीसा में जहां अधिकतर भाग नक्सलियों की समस्या से जूझ रहा है वहीं कई क्षेत्र अभी भी सरकार की योजनाओं से महरुम है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है -

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