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नोटों पर रोक से भ्रष्टाचार और आतंकी नेटवर्क पर यूं लगेगी लगाम

2007 में भ्रष्टाचार की अर्थव्यवस्था देश की इकॉनमी के 23.2 पर्सेंट के बराबर थी।

नोटों पर रोक से भ्रष्टाचार और आतंकी नेटवर्क पर यूं लगेगी लगाम
नई दिल्ली. जाली नोटों के धंधे में शामिल लोग आमतौर पर बड़े नोटों को ही अपना निशाना बनाते हैं। अपराधी, आतंकवादी और बड़े पैमाने पर अघोषित आय रखने वाले लोगों के लिए बड़े नोटों को रखना आसान होता है। ऐसे में 500 और 1000 रुपये के मौजूदा नोटों पर रोक लगाने से ऐसे लोगों पर लगाम कसी जा सकेगी। पूरे देश में चल रही करंसी में 500 और 1000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी फिलहाल 86 पर्सेंट है, जबकि 2007 में यह आंकड़ा 69 पर्सेंट था।
विश्व बैंक ने जुलाई, 2010 में जारी की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2007 में भ्रष्टाचार की अर्थव्यवस्था देश की इकॉनमी के 23.2 पर्सेंट के बराबर थी, जबकि 1999 में यह आंकड़ा 20.7 पर्सेंट के बराबर थी। इसके अलावा भारत समेत कई एजेंसियों ने भी इसी तरह के अनुमान जताए थे। हार्वर्ड की स्टडी के मुताबिक बड़े करंसी नोटों को बंद करने से टैक्स से बचने वालों, वित्तीय अपराधियों, आतंकियों के आर्थिक नेटवर्क और भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सकेगी।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े करंसी नोटों पर लगाम कसने के चलते अपराधियों के पकड़े जाने की संभावना अधिक होगी। बड़े नोटों को बंद करने से आतंकियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकेगा। आमतौर पर कैश ट्रांजेक्शन को हर जगह स्वीकार किया जाता है। इन नोटों को बड़ी संख्या में कहीं भी ले जाना आसान होता है और पकड़े जाने का खतरा बेहद कम रहता है। अपराधियों के लिए छोटे नोटों को रखने के मुकाबले इन्हें लेकर चलना आसान रहता है।
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