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ये हैं भारत के वो 5 खंडहर, जिनकी रहस्यमयी कहानी जानकर दहल जाएगा दिल

अलवर जिले में स्थित भानगढ़ को भूतों का गढ़ कहलाता है। यहां सूर्यास्त के बाद कोई व्यक्ति नहीं रूकता। लोगों के मन में इस इलाके को लेकर इतना भय है कि शाम ढलते-ढलते वह यहां से निकलना ही बेहतर समझते हैं।

भानगढ़ किले को आमेर के राजा भगवंत दास ने बनवाया था। भगवंत दास के छोटे बेटे और मुगल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया। यह किला चारदीवारी से घिरा है जिसके अंदर घुसते ही दाहिनी ओर कुछ हवेलियों के अवशेष दिखाई देते हैं।

भानगढ़ के किस्से अनेकों रहस्मयी कहानियों से भरे हैं जो अलग अलग तरह से लोगों के बीच आते हैं कहा जाता है कि भानगढ से सम्‍बन्धित कथा उक्‍त भानगढ बालूनाथ योगी की तपस्‍या स्‍थल था। जि‍सने इस शर्त पर भानगढ के कि‍ले को बनाने की सहमति दी थी कि कि‍ले की परछाई कभी भी मेरी तपस्‍या स्‍थल को नही छूनी चाहिए।
लेकिन राजा माधो सि‍हं के वंशजो ने इस बात पर ध्‍यान नही देते हुए कि‍ले का निर्माण ऊपर की ओर जारी रखा इसके बाद एक दि‍न कि‍ले की परछाई तपस्‍या स्‍थल पर पड़ गई जि‍स पर योगी बालूनाथ ने भानगढ को श्राप देकर ध्वस्‍त कर दि‍या।
श्री बालूनाथ जी की समाधियां अभी भी वहां पर मौजूद है।
इसके अलावा इस इमारत से एक कहानी और जुड़ी हुई है,ऐसा माना जाता है कि भानगढ की राजकुमारी रत्‍नावती बेहद खूबसूरत थी जि‍सके स्‍वयंवर की तैयारी चल रही थी परन्‍तु उसी राज्‍य मे एक तान्‍तरि‍क सिंघि‍या नाम का था जो
राजकुमारी को पाना चाहता था।
लेकिन यह संभव नही था इसलि‍ए उसने राजकुमारी की दासी जो कि राजकुमारी के श्रंगार के लि‍ये तेल लेने बाजार आयी थी उस तेल को जादू से सम्‍मोहि‍त करने वाला बना दि‍या।
राजकुमारी रत्‍नावती के हाथ से वह तेल एक चटटान पर गि‍रा तो वह चटटान तान्‍तरि‍क सिंघि‍या के ऊपर लुड़कते हुए गिर गई जिससे सिंघिया की मौत हो गई। सिंघिया ने मरने से राजकुमारी और उस किले को श्राप दे दिया जि‍ससे यह नगर ध्‍वस्‍त हो गया।
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