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कर्नाटक में कुमारस्वामी की सरकार बनने के बाद भी नहीं खत्म होंगी ये 5 चुनौतियां

कर्नाटक में येदियुप्पा के इस्तीफे के बाद कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बना रही हैं। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी बुधवार को सीएम पद की शपथ लेंगे। जिसके बाद वो राज्य के सीएम बन जाएंगे और उसके साथ कई और अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।

कर्नाटक में कुमारस्वामी की सरकार बनने के बाद भी नहीं खत्म होंगी ये 5 चुनौतियां
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कर्नाटक में येदियुप्पा के इस्तीफे के बाद कांग्रेस और जेडीएस मिलकर सरकार बना रही हैं। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी बुधवार को सीएम पद की शपथ लेंगे। जिसके बाद वो राज्य के सीएम बन जाएंगे और उसके साथ कई और अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच अबतक कई बार मतभेद सामने आ चुके हैं और नेता इसपर सफाई भी दे रहे हैं। यही नहीं दोनों को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में भी कोई रुकावट नहीं आएगी।

लेकिन हम आपको वो 5 चुनौतियों को बारे में बताने जा रहे जो सरकार बनाने के बाद भी इन दोनों पार्टियों से खत्म नहीं होगी।

1. लिंगायत समुदाय: जेडीएस और कांग्रेस से ही नहीं बल्कि बीजेपी की भी लिंगायत समुदाय के बीच काफी अच्छी पकड़ है। जेडीएस और कांग्रेस में 20 ऐसे विधायक हैं जो इस समाज से आते हैं। ऐसे में हमेशा इस समुदाय को खुश रखना कुमारस्वामी के लिए एक चुनौति होगी। ऐसे में बीजेपी इन विधायकों को भी आने वाले वक्त में लुभा सकती है।

2. कावेरी विवाद: केरल और तमिलनाडु के बीच चला आ रहा कावेरी जल विवाद भी इस सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। खबर है कि राजनीति में कदम रखने वाले रजनीकांत और कुमारस्वामी के बीच मुलाकात होगी और वो उनके शपथग्रहण में शामिल हो सकते हैं। लेकिन इसी बीच दोनों को कावेरी विवाद पर भी चर्चा करनी होगी। क्योंकि कई बार कावेरी विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच काफी बर्बादी की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में ये मुद्दा भी इस सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

3. कृषि समस्या: पिछली सरकार की तरह इस सरकार के लिए भी कृषि संकट दूर करना एक चुनौती होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के दौरान राज्य में 35,000 से भी ज्यादा किसानों के खुदकुशी की थी। लेकिन जेडीएस पहले से ही अपने आपको किसानों का हितेशी बता चुकी है। ऐसे में सरकार को किसानों को भी खुश रखना होगा क्योंकि बीजेपी भी अपने आपको किसानों का हितेशी और घोषणापत्र में कई ऐलान कर चुकी है।

4. कर्नाटक बनाम कर्नाटक: पूरे कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस कांग्रेस की अपने अपने इलाके बंटे हुए हैं। जेडीएस को दक्षिणी कर्नाटक की पार्टी के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसे में नए सीएम को भेदभाव की नीति को दूर रखकर पूरे राज्य के लिए काम करना होगा।

5. सिद्धारमैया और देवगौड़ाः कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस भले ही एक साथ चलने को राजी हो गई हो। लेकिन इन दोनों पार्टी के नेताओं को एक दूसरे के साथ ताल से ताल मिलाकर चलना होगा। अगर ऐसे में इन दोनों के बीच टकरार होती है तो बीजेपी इसका फायदा उठा लेगी।

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