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पैलेट गन की बजाय ये 5 हथियार इस्तेमाल करे सेना

देश में उग्र-भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है।

पैलेट गन की बजाय ये 5 हथियार इस्तेमाल करे सेना
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नई दिल्ली. जम्मू कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सात सदस्यों की एक समिति सरकार को अपनी रिपोर्ट देने को तैयार है। पैलेट गन के इस्तेमाल से घाटी में कई युवाओं ने अपनी आंखे खो दी थी, तो वहीं कुछ बुरी तरह घायल हो गए थे।
ज्ञात हो कि देश में उग्र-भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा दंगे भड़काने और सेना पर पत्थर फेंकने के मामलों में उग्र-भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है। जिसपर पूरे देश में विवाद बना हुआ है।
आइए आपको बताते है कि सुरक्षा और हमलों के मामलों में उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक अस्थायी हथियार के रूप में पैलेट गन के अलावा और कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं-
1- डाई मार्कर ग्रेनेड- सुरक्षा कर्मियों द्वारा हाथ से फेंका जाने वाला यह डाई और रासायनिक ग्रेनेड है। इससे जलन होती है। यह संवेदनशीलता को प्रभावित करता है। इसके अलावा इससे बाद में एक निशां भी बन जाता है जिसे सुरक्षा कर्मी आसानी से पहचान सकते हैं। प्रदर्शनकारियों पर यह 35 मीटर की दूरी पर फेंका जा सकता है।
2- प्लास्टिक आंसू और धुंआ गैस- पेलेटिस्ड रूप में सीज़ियम (सीएस) रासायनिक से बनाई गई यह एक बन्दूक की तरह होती है। जिसमें एक सॉफ्ट नोक बनी होती है। यह भीड़ को नियंत्रित करने और घने जंगल में छुपे बदमाशों को निकालने में काम आती है। प्लास्टिक बॉडी से बनी इसकी नोक से थोड़ी गंभीर चोट की भी सम्भावना रहती है। हालांकि बदमाशों को नियंत्रण में करने के लिए यह आवश्यक है। ये लंबी दूरी करीब 38 मिमी तक निशाना साधने में काम आती हैं। यह फायर और गैस बंदूक के रूप में जानी जाती हैं।
3-आंसू ग्रेनेड गैस- पेलेटिस्ड के रूप में सीएस रासायनिक से बना यह ग्रेनेड 35 मीटर (10 मीटर) की दूरी पर प्रदर्शनकारियों पर फेंका जा सकता है। हालांकि डायरेक्ट हिट से यह प्रदर्शनकारियों को गंभीरता से घायल कर सकता है। इसकी प्लास्टिक बॉडी धुएं के उत्सर्जन के साथ तुरंत पिघलना शुरू हो जाती है। यह बड़े-बड़े क्षेत्रों में काम में लाया जाता है, क्योंकि एक बड़े क्षेत्र में तुरंत धुंआ फ़ैलाने के लिए यह काम में लाया जाता है।
4-स्टन ग्रेनेड- यह हाथ से फेंका जाने वाला प्लास्टिक से बना एक ग्रेनेड बम जैसा है। यह 40 मीटर की रेंज तक फेंका जा सकता है। इससे कुछ मिनटों में ही पूरे माहौल में चकाचौंध और फ्लैश फ़ैल जाती है।
5-चिली ग्रेनेड- उत्तर-पूर्व में पाई जाने वाली दुनिया की सबसे तीखी भुत झोलकिया मिर्च और नागा चिली को ग्रेनेड में प्रयोग किया जाता है। करीब 45 मिलीमीटर तक हाथ से फेंका जा सकता है। एक बड़े क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में चिली ग्रेनेड को काम में लाया जा सकता है। इससे धुंआ निकलता है जो भीड़ को तितर-बितर कर देता है। उग्र भीड़ को कंट्रोल करने के लिए इसको इस्तेमाल किया जा सकता है।
6- पीपर बॉल (काली मिर्च के गोले)- पीपर बॉल गन्स में काली मिर्च के गोले लगे जाते हैं जो जलन करने वाला धुंआ और आग छोड़ते हैं। इस गोले के संपर्क में आने पर आंख, नाक और गले में जलन होती है। यह कुछ विशेष दलों के लिए डिजाइन की जाती हैं और अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशो में प्रदर्शनकारियों पर खासतौर पर इस्तेमाल होती हैं। फिलहाल भारत में यह उपलब्ध नहीं हैं।
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