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राजा छत्रसाल के गुरु महामति प्राणनाथ का मनाया 400 वां जन्म महोत्सव, यात्रा में शामिल हुए 4 हजार भक्त

मध्यकालीन भारत के महान समाज सुधारक, महाराजा छ्त्रसाल के धर्मगुरु एवं श्री कृष्ण प्रणामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक महामति प्राणनाथ के जन्म का 400 वां सालगिरह देश व विदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

राजा छत्रसाल के गुरु महामति प्राणनाथ का मनाया 400 वां जन्म महोत्सव, यात्रा में शामिल हुए 4 हजार भक्त

मध्यकालीन भारत के महान समाज सुधारक, महाराजा छ्त्रसाल के धर्मगुरु एवं श्री कृष्ण प्रणामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक महामति प्राणनाथ के जन्म का 400 वां सालगिरह देश व विदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

हफ्ते भर चले इस महोत्सव का समापन दिल्ली के छ्त्रसाल स्टेडियम में विशाल शोभायात्रा के साथ किया गया। शोभा यात्रा श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर शक्तिनगर से प्रातः 10 बजे महामति प्राणनाथ जी की सवारी रथ की आरती कर प्रारम्भ हुई।

इस यात्रा में देश तथा विदेश से प्राणनाथ जी के अनुयायी एवं दिल्ली के भक्तजन 4000 की संख्या में उपस्थित थे। शोभा यात्रा 5 किलोमीटर की थी। सभी लोगों ने पैदल यात्रा की।

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विशाल शोभा यात्रा के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा के सांसद एवं भाजपा के उत्तरपूर्व के प्रभारी श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी-दमोह ने महामति प्राणनाथ जी की डाक टिकट के लिए जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कार्य के लिए मैं खुद अपना योगदान करूँगा।

महामति प्राणनाथ का संदेश- विश्व शांति, विश्व मानव एकता, सर्वधर्म समभाव, दलित उद्धार, विकारमुक्त समाज आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सटीक हैं।

यही वजह है कि 400 सालों से ज्यादा समय से समाज में कार्यरत श्री कृष्ण प्रणामी सम्प्रदाय आज भी अपने सिद्धांतों और निष्काम सेवा के वदौलत विद्यमान ही नहीं वल्कि लोगों के बीच लोकप्रिय है। आज श्री कृष्ण प्रणामी सम्प्रदाय से जुड़े लोगों की संख्या 1 करोड़ से अधिक है, जो इस धर्म के विचार और आदर्शों को सत्यापित करता है।

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महामति प्राणनाथ के 400 वें जन्मोत्सव पर श्री कृष्ण प्रणामी विश्व परिषद् के अध्यक्ष स्वामी सदानन्द महाराज ने बताया कि- महामति प्राणनाथ के प्राकट्य के चतुर्थ शताब्दी के अवसर पर उनके दिव्य संदेश के प्रचार के लिए 19 सितंबर 2017 से “जागनी रथ” भारत के सभी प्रांतों समेत पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान में चल रहा है। यह रथ मार्च 2019 तक अलग-अलग स्थानों पर परिक्रमा करता रहेगा।

विश्व- बंधुत्व, सामाजिक सद्भाव और एकता का पर्याय श्री कृष्ण प्रणामी धर्म के आज दुनियाभर में 600 से अधिक मंदिर और 200 आध्यात्मिक केंद्र देश व विदेश में धर्म एवं संस्कार की शिक्षा देने में कार्यरत हैं।

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