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इंटरनेट लवर्स के लिए खुशखबरी, 3G होगा बेहद सस्ता

टेलीकॅाम रेगुलेरिटी ऑफ इंडिया ने सुझाव देते हुए कहा है कि फरवरी में होने वाली 800, 900 और 1800 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम नीलामी के साथ ही 2100 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी भी कराई जानी चाहिए।

इंटरनेट लवर्स के लिए खुशखबरी, 3G होगा बेहद सस्ता
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नई दिल्ली.टेलीकॅाम रेगुलैरिटी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने आज देशभर के 22 दूरसंचार सर्किलों में 2100 मैगाहट्रर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 2,720 करोड़ रुपए प्रति मैगाहट्रर्ज रखने की सिफारिश की है। हालांकि मूल्य 2010 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी के आधार मूल्य के मुकाबले करीब 22 फीसदी कम है। उस दौरान 2100 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 3,500 करोड़ रुपए प्रति मैगाहट्रर्ज रहा था जिससे सरकारी खजाने को 67,700 करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी हुई थी।

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टेलीकॅाम रेगुलेरिटी ऑफ इंडिया ने सुझाव देते हुए कहा है कि फरवरी में होने वाली 800, 900 और 1800 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम नीलामी के साथ ही 2100 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी भी कराई जानी चाहिए। इस बीच दूरसंचार नियामक ने 2100 मैगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 800 मैगाहट्ïर्ज स्पेक्ट्रम के आधार मूल्य से करीब 14 फीसदी कम रखा गया है। हालांकि यह 900 मैगाहट्ïर्ज बैंड के स्पेक्ट्रम के आधार मूल्य से भी कम है लेकिन 1800 मेगाहट्ïर्ज बैंड के मुकाबले काफी अधिक है।

गौरतलब है कि टेलीकॅाम रेगुलेरिटी ऑफ इंडिया ने पहले भी 1800 मैगाहट्रर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 2,138 करोड़ रुपए प्रति मैगाहट्ïर्ज (20 सर्किल में) रखने का सुझाव दिया था। इसी प्रकार देश के 18 उन दूरसंचार सर्किलों में 900 मैगाहट्ïर्ज स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 3,004 करोड़ रुपए रखने की सिफारिश की गयी थी। साथ ही दूरसंचार नियामक ने देश भर में 800 मेगाहट्ïर्ज स्पेक्ट्रम के लिए आधार मूल्य 3,104 करोड़ रुपए प्रति मैगाहट्ïर्ज रखने की सिफारिश की गयी थी।

इस बार टेलीकॅाम रेगुलैरिटी ऑफ इंडिया ने सिफारिश की है कि दूरसंचार विभाग को नीलामी के लिए और 15 मैगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम पेश करना चाहिए जो रक्षा विभाग के साथ अदला-बदली के जरिए विभाग को मिलने वाला है लेकिन विभाग को उम्मीद है कि रक्षा मंत्रालय से 3जी बैंड (2100 मेगाहट्र्ज बैंड) का फिलहाल 5 मैगाहट्रर्ज स्पेक्ट्रम ही मिल सकेगा। ट्राई ने कहा,'रक्षा मंत्रालय 1900 मेगाहट्र्ज बैंड के स्पेक्ट्रम के बदले 2100 मैगाहट्रर्जमैगाहट्र्ज बैंड का 15 मैगाहट्रर्ज स्पेक्ट्रम खाली कर रहा है। रक्षा विभाग के साथ सैद्धांतिक आधार पर हुए समझौते के मद्देनजर उस स्पेक्ट्रम को भी नीलामी पर रखा जाना चाहिए भले ही वह तत्काल उपलब्ध न हो।'

ट्राई ने कहा कंपनियों को स्पेक्ट्रम तत्काल उपलब्ध नहीं कराना है। इसके साथ ही सुझाव दिया है कि दूरसंचार विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाने चाहिए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में फरवरी 2012 में जो 122 लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद एसटेल ने अपना परिचालन बंद कर दिया था। यह भी उल्लेखनीय है कि 3जी स्पेक्ट्रम के लिए 2010 में तय न्यूनतम मूल्य ही 2008 के 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में 1.76 लाख करोड़ रुपए की राजस्व नुकसान के सीएजी के अनुमान का आधार बना।

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