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सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2: जिन बंकरों को तबाह किया गया उसमें थे 30 जवान!

सेना ने जवानों के साथ बर्बरता पर पाक को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2: जिन बंकरों को तबाह किया गया उसमें थे 30 जवान!

बीते एक मई को जम्मू-कश्मीर के कृष्णा घाटी सेक्टर में पाक सेना द्वारा दो भारतीय जवानों की निमर्म हत्या का सेना ने नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की कई सैन्य चौकियों को तबाह कर न सिर्फ उसे मुंहतोड़ जवाब दिया है।

बल्कि चेतावनी भरे लहजे में यह स्पष्ट भी कर दिया गया है कि अगर उसने नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लेकर कश्मीर घाटी के अंदर आतंकियों को मदद पहुंचाना बंद नहीं किया तो आने वाले दिनों में उसे भारतीय सेना का और विकराल रूप देखने को मिलेगा।

इसमें घाटी के भीतर से लेकर एलओसी तक सेना अपने आतंकवाद रोधी अभियानों (सीआईऑप्स) को और धार देती हुई नजर आएगी।

जिससे आतंकवादियों और उनके मददगारों के लिए बचने की कोई जगह नहीं बचेगी। गौरतलब है कि बीते वर्ष उरी हमले के जवाब में 28-29 सितंबर 2016 की रात को सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में बनाए गए आतंकियों के लांच पैड तबाह करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।

अब नौशेरा में सेना द्वारा यह दूसरी बड़ी कार्रवाई की गई है। सेना जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़ने के लिए अपने अभियान चलाती रहती है। लेकिन यह पहला ऐसा मौका है जब सेना ने खुले तौर पर अपनी कार्रवाई का वीडियो जारी किया है।

बड़े हथियारों का इस्तेमाल

यहां मंगलवार को सेना के सार्वजनिक सूचना विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल अशोक नरूला ने कहा कि बीते 9 मई को सेना ने एलओसी पर नौशेरा सेक्टर में बड़े हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान की कई चौकियों को एक साथ नेस्तनाबूद किया है।

इसकी पुष्टि के लिए सेना ने 30 सैकेंड का एक वीडियो भी साझा किया है। नौशेरा का इलाका जम्मू रीजन में पड़ने वाली पीर पंजाल की पहाड़ियों के दक्षिण का इलाका है।

सेना की इस कार्रवाई में चार तरह के बड़े विध्वसंक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इसमें रॉकेट लांचर, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम), ऑटोमैटिक ग्रैनेड लांचर और रीक्वॉलर्स बंदूक शामिल है।

मेजर जनरल नरूला ने कहा कि पाक की जिन चौकियों को हमने निशाना बनाया है। वो प्लाटून स्तर की हैं और उसमें करीब 30 जवान एक साथ मौजूद रह सकते हैं।

ऐसी थी सर्जिकल स्ट्राइक

पीओके में बने हुए आतंकियों के प्रशिक्षण शिविरों को तबाह करने के लिए सेना के स्पेशल कमांड़ो दस्ते ने अहम भूमिका निभायी थी। यह कुल करीब 150 जवानों का दस्ता था।

जिसने एलओसी को लांघकर 7 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। इस कार्रवाई में करीब 40 आतंकवादी मारे गए थे। सेना का कहना था कि उसने यह हमला एलओसी के कुछ किलोमीटर अंदर जाकर अंजाम दिया गया था।

घुसपैठ बढ़ेगी, तेज होंगे सीआईऑप्स

बीते 21 मई को नौगाम में सेना की आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई। इसमें कुल चार आतंकियों को मार गिराया गया था। यह बर्फ पिघलने और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में दर्रे खुलने के बाद कश्मीर घाटी के अंदर आतंकियों की मौजूदगी का प्रत्यक्ष प्रमाण है। भविष्य में आतंकियों की मौजूदगी के और भी प्रमाण सामने आ सकते हैं।

इसे ध्यान में रखकर सेना ने निर्णय लिया है कि वो घाटी के अंदर और एलओसी पर होने वाली आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए चलाए जाने वाले आतंकवाद रोधी अभियानों को सशक्त करेगी।

आंकड़ों के हिसाब से एलओसी के करीब पीओके में कुल 17 लांच पैड से आतंकियों की घुसपैठ होने की आशंका है। इस वक्त कश्मीर के अंदर कुल करीब 200 आतंकी घुसपैठ के जरिए पहुंचने में सफल हुए हैं। इसमें 98 स्थानीय हैं। इस संख्या में भविष्य में इजाफा होने की पुरजोर संभावना है।

सीआईऑप्स नीति बनी आधार

सेना ने अपनी सीआईऑप्स नीति के जरिए ही नौशेरा में पाक सेना की पोस्टों को निशाना बनाया है। यह वो पोस्ट हैं, जिनके जरिए पाक आतंकियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराता है। इस दौरान सेना की अग्रिम चौकियों पर गोलीबारी कर भारतीय सेना के जवानों का ध्यान भटकाने की कोशिश भी की जाती है।

गोलीबारी में कई निर्दोष गांव वाले भी निशाना बनते हैं। सेना चाहती है कि आतंकियों की घुसपैठ पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। इसके लिए सीआईऑप्स की मदद ली जाती है, जिनके जरिए हम समय-समय पर एलओसी पर सेना के प्रभाव को मजबूत करने का प्रयास करते हैं।

कार्रवाई में दुश्मन की पोस्टों के अलावा आतंकियों के प्रवेश मार्गों को भी निशाना बनाया जाता है। सेना चाहती है कि जम्मू-कश्मीर में अमन और शांति स्थापित हो। इसके लिए घुसपैठ को नियंत्रित किया जाना बेहद जरूरी है। इससे सूबे के युवाओं को आतंकवाद की ओर प्रेरित होने से बचाया जा सकेगा।

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